बिहार में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को रहने के लिए कमरा खोजने की परेशानी से काफी हद तक राहत मिलने वाली है। सरकार ने राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए निजी भवनों में आवासन की व्यवस्था करने की योजना को मंजूरी दे दी है।


इस फैसले का सीधा फायदा राज्य के करीब 49 हजार छात्र-छात्राओं को मिलने की उम्मीद है। सरकार की इस पहल के बाद उन विद्यार्थियों की मुश्किलें कम होंगी, जो अपने घर से दूर रहकर इंजीनियरिंग या पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं। खासकर दूसरे जिलों से आने वाले छात्रों के लिए कॉलेज के आसपास सुरक्षित और उचित किराये पर कमरा ढूंढना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है।


सरकार की योजना के मुताबिक, निजी भवनों में विद्यार्थियों के लिए रहने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए प्रति छात्र प्रति बेड हर महीने एक हजार रुपये की दर से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यानी विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था पर सरकार सीधे आर्थिक सहायता देगी, जिससे संस्थानों में आवासन की समस्या को दूर करने की कोशिश की जाएगी।


मंत्रिमंडल सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में फिलहाल करीब 49 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं। यदि इन सभी विद्यार्थियों के लिए आवासन की व्यवस्था की जाती है तो सरकार को हर महीने लगभग 4 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च करने होंगे।


पूरे साल का हिसाब लगाया जाए तो इस योजना पर सरकार का संभावित खर्च करीब 58 करोड़ 80 लाख रुपये होगा। यानी सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के लिए रहने की सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।


दरअसल, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में दाखिला लेने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने गृह जिले से बाहर जाकर पढ़ाई करते हैं। कॉलेज में हॉस्टल की पर्याप्त सुविधा नहीं होने पर उन्हें आसपास के इलाकों में निजी मकान या कमरा किराये पर लेना पड़ता है। कई बार किराया अधिक होने, कमरा आसानी से नहीं मिलने या रहने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।खासकर छात्राओं के लिए कॉलेज के आसपास सुरक्षित आवास की तलाश एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहती है। ऐसे में निजी भवनों में आवासन की सरकारी व्यवस्था शुरू होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।


सरकार का मानना है कि रहने की समस्या कम होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलेगा। अभी कई छात्र कॉलेज से काफी दूर कमरा लेने के लिए मजबूर होते हैं। इससे आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होता है। यदि संस्थान के आसपास ही आवासन की सुविधा उपलब्ध हो जाती है तो विद्यार्थियों का समय बचेगा और वे अपनी पढ़ाई, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।


सरकार का यह फैसला केवल रहने की सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे तकनीकी शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो राज्य के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।


यानी अब इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के सामने ‘रहेंगे कहां?’ वाली चिंता भी कम होने की उम्मीद है। सरकार की नई व्यवस्था से उन्हें पढ़ाई के लिए ज्यादा सुविधाजनक और बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।