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Bihar Electronic City: पटना के पास बनेगी बेंगलुरु मॉडल की इलेक्ट्रॉनिक सिटी, 1 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

बिहार सरकार पटना के पास बेंगलुरु मॉडल पर इलेक्ट्रॉनिक सिटी बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे करीब 1 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य में बड़ी आईटी व इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों का निवेश बढ़ेगा।

14-Mar-2026 09:05 AM

By First Bihar

Bihar News : बिहार सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक नई पहल कर रही है। सरकार अब बेंगलुरु मॉडल पर बिहार में भी इलेक्ट्रॉनिक सिटी विकसित करने की योजना पर गंभीरता से काम कर रही है। इस परियोजना के माध्यम से राज्य में देश-विदेश की बड़ी आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को लाने की तैयारी है। सरकार का अनुमान है कि इस पहल से करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है।


इलेक्ट्रॉनिक सिटी की स्थापना को लेकर उद्योग विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में उद्योग सचिव कुंदन कुमार के नेतृत्व में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम अध्ययन के लिए बेंगलुरु गई हुई है। यह टीम वहां की इलेक्ट्रॉनिक सिटी के विकास मॉडल, बुनियादी ढांचे, निवेश नीति और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया का गहराई से अध्ययन करेगी। अध्ययन के बाद टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर बिहार में इलेक्ट्रॉनिक सिटी के विकास की आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।


जानकारी के अनुसार उद्योग विभाग राजधानी पटना के आसपास ही इस इलेक्ट्रॉनिक सिटी को विकसित करने की योजना बना रहा है। सरकार पहले से ही पटना के निकट फिनटेक सिटी, लॉजिस्टिक पार्क और एजुकेशन सिटी जैसी परियोजनाओं पर काम कर रही है। अब इलेक्ट्रॉनिक सिटी को जोड़कर इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े आर्थिक और तकनीकी हब के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार की जा रही है। इससे राज्य में उद्योगों का नया इकोसिस्टम विकसित होगा।


बिहार सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक सिटी बनने से राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही बिहार के वे प्रतिभाशाली युवा जो आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में देश के दूसरे राज्यों या विदेशों में काम कर रहे हैं, उन्हें अपने राज्य में ही बेहतर अवसर मिल सकेंगे। सरकार यह भी चाहती है कि यह परियोजना अन्य राज्यों के पेशेवरों और निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने।


हाल ही में आयोजित निवेशकों, उद्यमियों और निर्यातकों के सम्मेलन में भी इस तरह के औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने के सुझाव सामने आए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिहार में इलेक्ट्रॉनिक सिटी विकसित होती है तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नई नीतियां लागू की हैं, जिन्हें देश में बेहतर औद्योगिक नीतियों में गिना जा रहा है। इसी क्रम में इलेक्ट्रॉनिक सिटी की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।


बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी को भारत के सबसे प्रमुख आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स औद्योगिक केंद्रों में से एक माना जाता है। करीब 800 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस परिसर में 200 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल, टेक महिंद्रा और बायोकॉन जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। यह क्षेत्र न केवल आईटी कंपनियों का बड़ा केंद्र है, बल्कि आउटसोर्सिंग और तकनीकी सेवाओं के लिए भी प्रमुख हब के रूप में विकसित हो चुका है। यहां तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है और यह क्षेत्र अब एक बड़े आवासीय इलाके के रूप में भी विकसित हो चुका है।


इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के अंतर्गत ट्रांजिस्टर, डायोड, माइक्रोप्रोसेसर और इंटीग्रेटेड सर्किट जैसे मूल घटकों से लेकर कंप्यूटर, मोबाइल फोन, टेलीविजन और डिजिटल कैमरा जैसे उत्पादों के निर्माण की संभावना होती है। इसके अलावा लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, गेम कंसोल, स्मार्टवॉच, ऑडियो सिस्टम और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण भी ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।


राज्य के उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक सिटी की स्थापना को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया, “हम सूबे में इलेक्ट्रॉनिक सिटी स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहे हैं। उद्योग सचिव और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बेंगलुरु गई है, जो वहां की पूरी व्यवस्था का अध्ययन कर रही है। टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”