Bihar School News : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में शिक्षा विभाग को लेकर सरकार को अपने ही विधायकों के सवालों का सामना करना पड़ा। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई और सरकार से तत्काल सुधार की मांग की। बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने सदन में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के कई इलाकों में आज भी ऐसी स्थिति है जहां महज दो कमरों में सैकड़ों बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

विधायक ने सदन में कहा कि कुछ विद्यालयों में सिर्फ दो कमरों में 565 बच्चों की पढ़ाई हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों को शिक्षा दी जा रही है या सिर्फ उन्हें बहलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में ऐसे कई स्कूल हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

77 हजार करोड़ के बजट के बावजूद स्कूलों की स्थिति खराब क्यों?

बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने मुख्यमंत्री से इस मामले में गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब सरकार शिक्षा विभाग के लिए करीब 77 हजार करोड़ रुपये का बजट बना सकती है तो फिर नए विद्यालयों के निर्माण के लिए जमीन खरीदने का प्रावधान क्यों नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी। अगर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है तो सबसे पहले उन स्कूलों को चिन्हित किया जाए जहां भवन, कमरे और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी है। ऐसे विद्यालयों की मरम्मत कराई जाए और जहां आवश्यकता है वहां नए स्कूलों का निर्माण कराया जाए।

विधायक ने कहा कि आज कई जगहों पर स्कूलों को दो शिफ्ट में चलाना पड़ रहा है। एक ही भवन में बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाना शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए चुनौती बन गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस दिशा में जल्द से जल्द आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

RJD विधायक ने भी उठाया प्राथमिक विद्यालयों की कमी का मुद्दा

इससे पहले आरजेडी विधायक बोगो सिंह ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति थी कि अगर किसी क्षेत्र में दो किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक विद्यालय नहीं है तो वहां नया विद्यालय खोला जाएगा। लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कई जगहों पर नए स्कूल नहीं खुल सके।

बोगो सिंह ने आरोप लगाया कि नए प्राथमिक विद्यालय खोलने के बजाय कई नए स्कूलों को पुराने विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया। इसी वजह से सरकार के आंकड़ों में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अधिक दिखाई देती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आज भी बच्चों को स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, वहां नए प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण कराया जाए।

"शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार", सरकार से कार्रवाई की मांग

आरजेडी विधायक ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि गांव-गांव तक बेहतर शिक्षा व्यवस्था पहुंचाई जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से खुद इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की। विधानसभा में हुई इस बहस ने बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक तरफ सरकार शिक्षा बजट बढ़ाने और शिक्षकों की नियुक्ति का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विधायक ही स्कूल भवन, कमरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों पर क्या कदम उठाती है और क्या आने वाले समय में बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल पाएगी।