Bihar Education News : शिक्षा विभाग में बड़े खेल का खुलासा हुआ है।मेकर - चेकर और अप्रूवर की मिली भगत से करोड़ों की सरकारी राशि पर डाका डाला गया है। शिक्षा विभाग ने पूरे खेल को पकड़ लिया है। विभाग के नए अपर मुख्य सचिव CK अनिल ने जब इसकी पूरी समीक्षा कराई तो विभागीय अधिकारी,जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्राधिकारी (स्थापना) के भ्रष्टाचार की पोल खुल गई.


 4 नवंबर 2026 को पूरे बिहार की जब समीक्षा की गई तब पाया गया कि सभी 38 जिलों में मेकर चेकर अप्रूवर की मिली भगत से एचआरएमएस पोर्टल पर छेड़छाड़ की गई। साथ ही कूट रचना कर वेतन मद, मकान किराया भत्ता, तथा एरियर मद में सीमा से अधिक राशि की अवैध निकासी की गई है। 4 नवंबर को समीक्षा में 38 जिलों में कुल 6895 मामले उजागर हुए हैं। इसमें 34 करोड़ 11 लाख 56 604 रुपए की अधिक निकासी का खुलासा हुआ है।


शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी से सरकारी राशि की अवैध निकासी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।कहा है कि  7 दिनों के अंदर बिंदुवार और साक्ष्य सहित रिपोर्ट दें, रिपोर्ट नहीं देने पर समझ जाएगा कि आपको इस संबंध में कुछ नहीं कहना है। सक्षम प्राधिकार उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर आपके खिलाफ एक तरफा निर्णय लेगा।


दरअसल, शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव सीके अनिल ने विभागीय कामकाज और वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा शुरू की तो HRMS पोर्टल पर हुई गड़बड़ियों की परतें खुलने लगीं। इसी क्रम में 4 नवंबर 2026 को पूरे बिहार की समीक्षा की गई। इस दौरान पता चला कि सभी 38 जिलों में HRMS पोर्टल के माध्यम से वेतन भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई है।


प्रारंभिक समीक्षा में यह बात सामने आई कि मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। आरोप है कि पोर्टल पर कूट रचना कर वेतन मद, मकान किराया भत्ता और एरियर मद में निर्धारित सीमा से अधिक राशि की निकासी की गई। यानी जिस राशि का भुगतान नियमानुसार नहीं होना चाहिए था, उसे भी सिस्टम के जरिए स्वीकृत कराकर सरकारी खजाने से निकाल लिया गया।


विभागीय समीक्षा में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। बिहार के सभी 38 जिलों में कुल 6895 मामले उजागर हुए हैं। इन मामलों में कुल 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अधिक निकासी का पता चला है। इन आंकड़ों से साफ है कि मामला केवल तकनीकी गलती या किसी एक कर्मचारी की लापरवाही तक सीमित नहीं दिख रहा है। विभागीय स्तर पर भुगतान की पूरी प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। 


इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर सरकारी राशि की अवैध निकासी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी सात दिनों के भीतर बिंदुवार जवाब दें। जवाब के साथ उन सभी तथ्यों और दस्तावेजों को भी प्रस्तुत करना होगा, जिनके आधार पर वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। विभाग ने अपने निर्देश में यह भी साफ कर दिया है कि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं देने को संबंधित अधिकारी की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने के रूप में माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम प्राधिकार एकतरफा निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।


इस पूरे मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। खासकर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि HRMS पोर्टल पर भुगतान से संबंधित बदलाव किसने किए, किस स्तर पर उन्हें सत्यापित किया गया और किस अधिकारी ने अंतिम मंजूरी दी।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 34 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के इस मामले में आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या यह पूरा खेल कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या इसमें विभागीय अधिकारियों की भी मिलीभगत थी? सात दिनों में मिलने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली जांच से इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।


फिलहाल, सीके अनिल की समीक्षा के बाद सामने आए इस खुलासे ने बिहार के शिक्षा विभाग की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग केवल स्पष्टीकरण लेकर मामला बंद करता है या फिर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी करता है।