Bihar News : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी महकमे में हलचल मचा दी है। किशनगंज की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) रूबी कुमारी और उनके रेलवे कर्मचारी पति गौरव कुमार यादव जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। आरोप है कि महज सात साल के दौरान दंपती ने करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। वहीं, जांच में सामने आई संपत्ति उनकी घोषित आय से कहीं अधिक बताई जा रही है।
मंगलवार की सुबह जब EOU की 12 सदस्यीय टीम किशनगंज पहुंची तो सरकारी कार्यालय से लेकर आवास तक जांच का सिलसिला शुरू हो गया। टीम ने किशनगंज के साथ कटिहार में भी एक साथ छापेमारी की। जमीन के दस्तावेज, गाड़ियों के कागजात, बैंकिंग लेन-देन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। इस कार्रवाई में 2.80 लाख रुपये नकद, सोने के गहने, जमीन के दस्तावेज और एक बेनामी स्कॉर्पियो से जुड़े कागजात मिलने की बात सामने आई है।
EOU के डीएसपी राकेश कुमार ने छापेमारी के बाद बताया कि रूबी कुमारी के खिलाफ आय से 87.49 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। इसी मामले में जांच के लिए टीम किशनगंज पहुंची थी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर एक सरकारी अधिकारी और रेलवे कर्मचारी पति की कमाई से इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खड़ी हुई?
7 साल में करोड़ों की संपत्ति, 2.45 करोड़ का DA केस
जांच एजेंसी के अनुसार, रूबी कुमारी और उनके पति के खिलाफ करीब 2.45 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने अपनी ज्ञात आय के मुकाबले काफी अधिक संपत्ति अर्जित की।बताया जा रहा है कि रूबी कुमारी को नौकरी के दौरान वेतन से करीब 72 लाख रुपये और उनके पति गौरव कुमार को लगभग 68 लाख रुपये की आय हुई।
इसके अलावा जमीन बेचने से 50 लाख रुपये, बैंक लोन से 79.47 लाख रुपये और अन्य स्रोतों से करीब 10 लाख रुपये की आमदनी दिखाई गई है। वहीं, दोनों का कुल खर्च करीब 83.39 लाख रुपये बताया गया है।लेकिन सवाल यह है कि जब आय और खर्च का हिसाब सामने है तो फिर करोड़ों की संपत्ति कहां से आई? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए EOU ने दोनों के ठिकानों पर दबिश दी।
2.80 लाख कैश, सोने के गहने और बेनामी स्कॉर्पियो
छापेमारी के दौरान जांच टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे। अधिकारियों के मुताबिक, ठिकानों से करीब 2.80 लाख रुपये नकद और लगभग 6 लाख रुपये मूल्य के गहने बरामद किए गए। इसके अलावा 229 ग्राम सोने के आभूषण, जमीन की रजिस्ट्री और गाड़ियों से जुड़े कागजात भी जांच के दायरे में हैं।
सबसे दिलचस्प मामला एक स्कॉर्पियो गाड़ी का है। आरोप है कि रूबी कुमारी ने अपने शपथपत्र में महंगी स्कॉर्पियो की जगह केवल 30 हजार रुपये की स्कूटी का जिक्र किया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि स्कॉर्पियो किसके नाम पर है और इसके खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई।जांच के दौरान कटिहार में खरीदे गए 10 प्लॉट और एक आलीशान अपार्टमेंट से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए हैं। इन संपत्तियों की खरीद और निर्माण में खर्च की गई रकम का स्रोत खंगाला जा रहा है।
शपथपत्र में 2.10 करोड़ के भवन का जिक्र नहीं?
इस पूरे मामले में संपत्ति के खुलासे से ज्यादा चर्चा शपथपत्र में दी गई जानकारी को लेकर हो रही है। जांच से जुड़े तथ्यों के मुताबिक, रूबी कुमारी ने अपने शपथपत्र में करीब 2.10 करोड़ रुपये के भवन का उल्लेख नहीं किया था।वहीं, उनके पति के नाम और संपत्ति से जुड़ी जानकारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पति के कॉलम में जानकारी नहीं दी गई, जबकि करीब 1.07 करोड़ रुपये की जमीन को पति से मिले गिफ्ट के रूप में दिखाया गया।
हलफनामे में 12 कैरेट हीरा, 300 ग्राम सोना और 1.75 किलो चांदी का भी जिक्र बताया गया है। अब EOU यह जांच कर रही है कि इन संपत्तियों और महंगे आभूषणों का वास्तविक स्रोत क्या है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
शिक्षिका से DPO तक का सफर, पूर्णिया से किशनगंज पहुंचीं रूबी
रूबी कुमारी की नौकरी और पोस्टिंग का इतिहास भी इस मामले में चर्चा का विषय बन गया है। मूल रूप से कटिहार जिले की रहने वाली रूबी कुमारी वर्ष 2018 तक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। इसके बाद उन्होंने BPSC के माध्यम से अधिकारी बनने का सफर तय किया।वर्ष 2019 में समग्र शिक्षा अभियान के तहत उनकी नियुक्ति हुई और पहली पोस्टिंग पूर्णिया में मिली। इसके बाद उनका तबादला गृह जिले कटिहार कर दिया गया। यहां उन्होंने करीब तीन साल तक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के रूप में काम किया।
इसके बाद 14 जुलाई 2025 को उनका तबादला किशनगंज कर दिया गया। फिलहाल वह किशनगंज में समग्र शिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के पद पर तैनात हैं।अब सवाल उठ रहा है कि गृह जिले कटिहार में तैनाती के दौरान खरीदी गई जमीन और बनाई गई संपत्तियों में कितनी रकम खर्च हुई? क्या इन संपत्तियों का संबंध उनके सरकारी कार्यकाल से है? EOU इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
रेलवे में पति की नौकरी, कटिहार में करोड़ों की संपत्ति
रूबी कुमारी के पति गौरव कुमार यादव उर्फ बंटी यादव रेलवे में कार्यरत हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह कटिहार रेल मंडल में सीनियर टीसी के पद पर तैनात हैं। इससे पहले उनके रेलवे में सहायक लोको पायलट के रूप में काम करने की भी जानकारी सामने आई है।उनके पिता मुक्ति यादव कटिहार के मारवाड़ी पाठशाला में प्रधानाध्यापक रह चुके हैं। परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं, जो फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं।जांच एजेंसी अब पति-पत्नी दोनों की आय, नौकरी, बैंक खातों और निवेश के बीच संबंध तलाश रही है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि रेलवे कर्मचारी की आय और DPO के वेतन के मुकाबले इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित हुई।
कटिहार में पांच मंजिला मकान, बंगाल तक फैली संपत्ति की चर्चा
EOU की जांच में कटिहार जिले में कई संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच जिले में अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदी गई। इसके अलावा करीब दो कट्ठा जमीन पर पांच मंजिला मकान का निर्माण कराया जा रहा है।कटिहार के मिरचाईबाड़ी और ऑफिसर कॉलोनी स्थित संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं। मंगलवार को टीम ने ऑफिसर कॉलोनी स्थित आवासीय भवन की तलाशी ली।इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और बागडोगरा इलाके में भी जमीन होने की चर्चा है। EOU इस संभावित संपत्ति के बारे में जानकारी जुटा रही है। अगर इन संपत्तियों की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
अब बैंक खाते से लेकर जमीन की रजिस्ट्री तक खंगालेगी EOU
छापेमारी के बाद अब जांच का अगला चरण शुरू होगा। EOU जमीन की रजिस्ट्री, संपत्ति के स्वामित्व, बैंक खातों, निवेश, लोन और मकान निर्माण में खर्च हुई रकम का हिसाब जुटाएगी।जांच एजेंसी के एडीजी अमित कुमार जैन के मुताबिक, दोनों को नोटिस देकर पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का मिलान किया जाएगा।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक शिक्षिका से DPO बनी महिला अधिकारी और रेलवे कर्मचारी पति की सात साल की कमाई आखिर कितनी थी और उनके पास करोड़ों की संपत्ति कहां से आई? अब EOU की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे।