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JEEVIKA Didi : बिहार जीविका दीदियां चलाएंगी कंप्यूटर, सरकार ने नई जिम्मेदारी दी; जानें क्या करना होगा

बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ई-निबंधन प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए जीविका दीदियों को डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। ये दीदियां गांव-गांव जाकर ई-निबंधन, विवाह निबंधन और अन्य सरकारी सेवाओं के प्रति जागरूकता

30-Dec-2025 09:50 AM

By First Bihar

JEEVIKA Didi : बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए एक नई पहल की है। इसके तहत अब जीविका दीदियों को ई-निबंधन और अन्य संबंधित सेवाओं के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसे 'डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी' के नाम से शुरू किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन निबंधन की प्रक्रिया को तेज, सुलभ और पारदर्शी बनाना है, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों का दौड़ लगाने की जरूरत न पड़े।


इस योजना के तहत राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (जीविका) के संयुक्त प्रयास से चयनित दीदियां गांव-गांव जाकर ई-निबंधन, विवाह निबंधन, गोदनामा निबंधन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की जानकारी देंगी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के लिए विशेष रूप से उन जीविका दीदियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने मैट्रिक, इंटरमीडिएट, कंप्यूटर डिप्लोमा या अन्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त की है।


चयनित दीदियों को कंप्यूटर, प्रिंटर और वाई-फाई की सुविधा के साथ-साथ कंप्यूटर संचालन, इंटरनेट उपयोग, ऑनलाइन फॉर्म भरने, दस्तावेज अपलोड करने और ई-निबंधन शुल्क जमा करने जैसी प्रक्रियाओं की विशेष प्रशिक्षण दी जाएगी। इसका उद्देश्य है कि दीदियां न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हों, बल्कि ग्रामीणों को ऑनलाइन निबंधन की पूरी प्रक्रिया समझा सकें।


वर्तमान में राज्य में लगभग डेढ़ करोड़ जीविका दीदियां कार्यरत हैं। प्रत्येक प्रखंड में जीविका कार्यालय हैं, जहां लगभग 805 दीदियां सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में 270 दीदी अधिकार केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां आवासीय प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज जारी किए जाते हैं। इस पहल के माध्यम से इन केंद्रों और दीदियों के नेटवर्क का प्रभाव और बढ़ाया जाएगा, जिससे ग्रामीण आसानी से निबंधन संबंधी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।


विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी। पहले चरण में एक हजार से अधिक जीविका दीदियों को डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी के रूप में चयनित किया जाएगा। इसके बाद उनकी गतिविधियों का आकलन कर पूरे राज्य में इसे विस्तार देने की योजना बनाई जाएगी।


इस पहल से ग्रामीणों को ई-निबंधन और अन्य सरकारी सेवाओं को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। लोग अब घर बैठे आवेदन फॉर्म भरने, दस्तावेज अपलोड करने और ऑनलाइन शुल्क जमा करने जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि निबंधन की प्रक्रिया भी पारदर्शी और तेज होगी।


सरकार की इस नई व्यवस्था से यह उम्मीद जताई जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुँच और सुलभता बढ़ेगी। दीदियों के माध्यम से ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का यह कदम उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी सक्षम बनाएगा। यह पहल विशेष रूप से उन ग्रामीणों के लिए सहायक होगी, जो तकनीकी रूप से कमज़ोर हैं या शहरों के कार्यालयों तक पहुँच नहीं रखते।


सक्षमा दीदियों के माध्यम से केवल ई-निबंधन ही नहीं, बल्कि विवाह निबंधन, गोदनामा निबंधन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँचाई जाएगी। इस तरह यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तिकरण का माध्यम बनेगी, बल्कि ग्रामीण प्रशासन और जनता के बीच विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ाएगी।


बिहार सरकार की इस पहल से स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना अब प्राथमिकता बन गया है। डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी के रूप में कार्यरत जीविका दीदियां ग्रामीणों के लिए एक सशक्त माध्यम साबित होंगी, जो उन्हें न केवल ऑनलाइन निबंधन बल्कि अन्य सरकारी सुविधाओं के उपयोग में भी समर्थ बनाएंगी।


इस पहल के जरिए राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण जनता को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करना और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर इसे पूरे बिहार में लागू करने की योजना है, जिससे राज्य के प्रत्येक गांव के नागरिक सरकारी सेवाओं से सीधे जुड़ सकेंगे और अपने अधिकारों का लाभ आसानी से उठा सकेंगे।


इस प्रकार डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी की पहल ग्रामीणों के लिए सहूलियत और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे बिहार के ग्रामीण समाज में तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा।