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18-Feb-2026 12:58 PM
By First Bihar
Bihar News : बिहार की राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद ने बुधवार को बिहार विधान परिषद में धान खरीद और एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) योजना को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष धान खरीद का जो लक्ष्य तय किया है, उसकी तुलना में अब तक बहुत कम खरीदारी की गई है, जो किसानों के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने सदन में कहा कि सरकार ने इस बार धान खरीद का लक्ष्य 36 लाख 85 हजार टन निर्धारित किया था, लेकिन अब तक मात्र 28 प्रतिशत धान की ही खरीद हो सकी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस वर्ष धान का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुआ है, तब सरकार ने कम लक्ष्य क्यों तय किया और शेष धान की खरीद अगले 10 से 12 दिनों में कैसे पूरी करेगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि निर्धारित समय में खरीद पूरी नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सुनील सिंह ने अपने दूसरे सवाल में एफआरके योजना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य के हर जिले में एफआरके प्लांट लगाए गए हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से पैक्स अध्यक्षों से कथित रूप से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सामने आई है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें चार अलग-अलग पत्र भेजे गए हैं, जिनमें इस तरह की मांग का उल्लेख किया गया है।
इस पर सभापति ने पूछा कि क्या संबंधित विभाग और अधिकारियों ने वास्तव में ऐसी चिट्ठी लिखी है। इस पर सुनील सिंह ने कहा कि यदि आदेश दिया जाए तो वे सदन के पटल पर उन चिट्ठियों को रखने के लिए तैयार हैं। सभापति ने उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बाद सुनील सिंह ने कहा कि वे दोनों चिट्ठियां सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं और यह गंभीर मामला है, जिसमें विभाग के पदाधिकारी स्वयं रिश्वत मांगने की बात लिख रहे हैं।
वहीं, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि सदन की नियमावली के अनुसार किसी मंत्री या सदस्य पर आरोप लगाने से पहले संबंधित दस्तावेजों के साथ सदन से अनुमति लेना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति आरोप लगाने की स्थिति में ऐसी बातों को सदन की कार्यवाही से हटाने की परंपरा रही है।
इस पर सुनील सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि यदि आसन का निर्देश हो तो वे विभाग द्वारा भेजी गई चिट्ठियां सदन के पटल पर रख देंगे। उन्होंने दोहराया कि यह मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सदन में कुछ देर तक इस मुद्दे को लेकर चर्चा और हंगामे की स्थिति बनी रही।