Bihar Daroga Paper Leak: बिहार में 1,799 पदों पर दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा अब पेपर लीक के आरोपों के कारण जांच के घेरे में है। कथित प्रश्नपत्र लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामले की जांच अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के हाथों में पहुंच गई है। सरकार के निर्देश के बाद EOU ने पूर्णिया और गया में दर्ज दोनों मामलों को टेकओवर कर लिया है। अब एजेंसी की नजर सिर्फ आरोपियों पर नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की तस्वीरों को एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचाया। जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूर्णिया में सामने आई प्रश्नपत्र की तस्वीरें गया में सक्रिय सॉल्वर गैंग तक पहुंची थीं? अगर दोनों मामलों के बीच डिजिटल कनेक्शन साबित होता है, तो जांच का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
पूर्णिया और गया के केस अब एक साथ जांचे जाएंगे
EOU ने पूर्णिया साइबर थाना और गया के रामपुर थाना में दर्ज मामलों को अपने हाथ में लिया है। दोनों मामलों के जांच अधिकारियों को पटना तलब किया गया है। उनसे केस डायरी, जब्ती सूची, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अब तक जुटाए गए फॉरेंसिक साक्ष्यों की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद EOU दोनों मामलों की घटनाओं को एक साथ रखकर जांच आगे बढ़ाएगी। एजेंसी यह जानने की कोशिश करेगी कि आरोपियों के बीच कोई सीधा संपर्क था या नहीं और प्रश्नपत्र की तस्वीरें किन-किन मोबाइल नंबरों और WhatsApp अकाउंट के जरिए आगे बढ़ीं।
WhatsApp चैट से खुलेगा कथित पेपर लीक का राज?
इस पूरे मामले में डिजिटल सबूत सबसे अहम माने जा रहे हैं। EOU मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, कॉल डिटेल, डिजिटल डिवाइस और GPS टाइम-स्टांप की जांच करेगी। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि प्रश्नपत्र की तस्वीर किस समय खींची गई, किस मोबाइल से भेजी गई और कितने समय के भीतर दूसरे लोगों तक पहुंची।
गया मामले में 'XYZ' नाम के WhatsApp ग्रुप का भी जिक्र सामने आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस ग्रुप में कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसी माध्यम से परीक्षा के प्रश्नों को हल करने के लिए सॉल्वर तक पहुंचाया गया था।
पूर्णिया से शुरू हुई तस्वीरों की कहानी
पूर्णिया मामले में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अनुपस्थित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र स्टोररूम में ले जाकर उनकी तस्वीरें खींचीं। इसके बाद कथित तौर पर ये तस्वीरें उनके ममेरे भाई पप्पू कुमार को WhatsApp के जरिए भेजी गईं। पप्पू कुमार खगड़िया के मानसी का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक वह इस मामले में एक अहम कड़ी हो सकता है और प्रश्नपत्र को आगे सॉल्वर गैंग तक पहुंचाने में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। पप्पू फिलहाल फरार बताया जा रहा है। उसके खिलाफ अदालत से इश्तेहार भी जारी हो चुका है। निर्धारित समय में सरेंडर नहीं करने पर उसके खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।
गया में वॉकी-टॉकी और डिजिटल डिवाइस से बढ़ा शक
गया में भी दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा के दौरान कथित सॉल्वर गैंग की गतिविधियों का मामला सामने आया था। पुलिस ने परीक्षा केंद्र के पास मंदिर से नालंदा निवासी आशुतोष को पकड़ा था। उसके पास से वॉकी-टॉकी, ब्लूटूथ और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए थे।जांच में चंडी के प्रमोद और आरा के दीपक का नाम भी सामने आया है। दोनों के फरार होने की बात कही गई है। पुलिस को एक 11 सदस्यीय WhatsApp ग्रुप की जानकारी भी मिली थी। आरोप है कि इसी ग्रुप के जरिए परीक्षा के प्रश्नों को हल कराने की कोशिश की जा रही थी। अब EOU इस ग्रुप की पूरी डिजिटल हिस्ट्री खंगाल सकती है।
अभ्यर्थी ने उपलब्ध कराए थे डिजिटल डिवाइस
गया मामले में पटना निवासी मुकेश का नाम भी जांच में सामने आया है। वह खुद दारोगा भर्ती परीक्षा का अभ्यर्थी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, मुकेश ने आशुतोष को तीन डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराए थे। वहीं, प्रश्नों को हल करने वाले कथित सॉल्वर के तौर पर अर्जुन का नाम सामने आया है। जांच में दीपक, प्रमोद, मुकेश, अमन और अर्जुन समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें कुछ के फरार होने की बात कही गई है।
27 मई को हुई थी मुख्य परीक्षा
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 1,799 पदों पर दारोगा भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा 27 मई को आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान ही पूर्णिया से प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर आने का मामला सामने आया। बाद में सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र, प्रश्न-पुस्तिका और खाली OMR शीट की तस्वीरें वायरल होने लगीं। अभ्यर्थियों ने इसे परीक्षा में गड़बड़ी का सबूत बताते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई। मामला पटना हाईकोर्ट तक भी पहुंचा, जहां अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सरकार और आयोग से जवाब मांगा गया।
रिजल्ट आया, फिर फिजिकल टेस्ट पर लगी रोक
विवाद के बीच BPSSC ने 19 जून को 10,759 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी किया था। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ने वाली थी। हालांकि, पेपर लीक के आरोप और अभ्यर्थियों की कानूनी लड़ाई के बीच गृह विभाग के निर्देश पर BPSSC ने फिजिकल टेस्ट को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। अब EOU के हाथ में जांच आने के बाद इस पूरे मामले में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
EOU की जांच से क्या खुलेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूर्णिया में खींची गई प्रश्नपत्र की तस्वीरें आखिर कहां-कहां पहुंचीं? क्या उनका गया के सॉल्वर गैंग से कोई सीधा संबंध था? WhatsApp ग्रुप में कौन-कौन लोग शामिल थे? और परीक्षा शुरू होने के बाद कितनी देर में प्रश्नपत्र की तस्वीरें आरोपियों तक पहुंचीं? इन सवालों के जवाब मोबाइल डेटा, WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड और GPS टाइम-स्टांप से तलाशे जाएंगे। अगर EOU पूर्णिया और गया के मामलों के बीच डिजिटल कनेक्शन स्थापित करने में सफल होती है, तो यह मामला सिर्फ दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा। जांच का दायरा बढ़कर अंतरजिला सॉल्वर सिंडिकेट और कथित पेपर लीक नेटवर्क तक पहुंच सकता है। फिलहाल EOU की नजर उन सभी डिजिटल कड़ियों पर है, जो यह बता सकती हैं कि परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीरें कहां से निकलीं, किसने भेजीं और आखिर किस-किस तक पहुंचीं।