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15-Jan-2026 10:08 AM
By First Bihar
Cyber Crime Bihar : बिहार में बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर राज्य सरकार अब इन मामलों की जांच इंस्पेक्टरों की बजाय दारोगा रैंक के अधिकारियों को सौंपने की तैयारी में है। गृह विभाग ने इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम में संशोधन की मांग की गई है। यह कदम राज्य में साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया को तेज करने और इंस्पेक्टरों पर बढ़ते काम के बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
डीजीपी बिहार, विनय कुमार ने बताया कि वर्तमान में आईटी एक्ट से जुड़े मामलों की जांच केवल न्यूनतम इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारियों द्वारा ही की जा सकती है। राज्य में करीब 1200 से 1300 इंस्पेक्टर साइबर मामलों की जांच के लिए उपलब्ध हैं। लेकिन पिछले साल 2025 में साइबर थानों में 6319 मामले दर्ज किए गए, जबकि साइबर ठगी और इंटरनेट से जुड़े अन्य अपराधों की शिकायतें लाखों में हैं। केवल एनसीआरपी हेल्पलाइन नंबर पर 27.96 लाख कॉल आए, वहीं ऑनलाइन शिकायतों की संख्या 1.17 लाख रही। इंटरनेट मीडिया और अन्य साइबर अपराधों से जुड़ी 15,218 शिकायतें प्राप्त हुईं। इस बीच, पिछले साल 1050 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
डीजीपी ने बताया कि साइबर अपराधों की जांच में काफी समय लगता है, क्योंकि यह तकनीकी और अंतर-राज्यीय मामलों से जुड़ा होता है। साइबर ठगी के अधिकांश मामलों में अपराधी दूसरे राज्यों से जुड़े होते हैं, और धन का ट्रांसफर या निकासी अलग-अलग स्थानों से होता है। इसके कारण, जांच अधिकारी को बैंक और अन्य स्थानों पर जाकर समन्वय करना पड़ता है, जिससे एक इंस्पेक्टर साल में केवल छह से आठ मामलों से अधिक की जांच नहीं कर सकता।
इस स्थिति को देखते हुए, दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देने की योजना है। राज्य में लगभग 12 से 13 हजार दारोगा रैंक के पदाधिकारी हैं। यदि उन्हें साइबर मामलों की जांच का अधिकार मिल जाता है, तो अनुसंधान पदाधिकारियों की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ जाएगी। इससे न केवल इंस्पेक्टरों पर काम का बोझ कम होगा, बल्कि साइबर मामलों की जांच में तेजी आएगी।
साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या और उनके तकनीकी स्वरूप को देखते हुए, राज्य सरकार ने साइबर थानों के मानवबल में भी वृद्धि की योजना बनाई है। डीजीपी ने बताया कि सभी जिलों के साइबर थानों में आईटी और कंप्यूटर बैकग्राउंड वाले पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जा चुकी है। आने वाले समय में साइबर थानों में और अधिक मानवबल की तैनाती की जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया और प्रभावी होगी।
गृह विभाग ने प्रस्ताव में कहा है कि आईटी एक्ट में संशोधन के बाद दारोगा रैंक के अधिकारी न्यूनतम इंस्पेक्टर रैंक के समकक्ष जांच करने में सक्षम होंगे। इससे तकनीकी मामलों और अंतर-राज्यीय साइबर अपराधों के समाधान में लगने वाले समय में कमी आएगी। डीजीपी ने कहा कि यह कदम साइबर अपराधियों को पकड़ने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करेगा।
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार मिलने से न केवल मामलों की त्वरित सुनवाई संभव होगी, बल्कि पुलिस का मानवबल अधिक कुशल तरीके से उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा, इस बदलाव से साइबर अपराधों के मामलों में डेटा एनालिसिस, बैंकिंग लेन-देन की जांच और अन्य तकनीकी जांच प्रक्रियाओं को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
राज्य सरकार की यह पहल साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कदम के रूप में देखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आईटी एक्ट में संशोधन के बाद यह बदलाव लागू कर दिया जाएगा, जिससे बिहार में साइबर अपराधों की जांच और नियंत्रण में सुधार आएगा। इस तरह, दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देने का प्रस्ताव राज्य में साइबर अपराधों की बेहतर और तेज जांच सुनिश्चित करेगा, जबकि इंस्पेक्टरों पर काम का बोझ भी घटेगा और जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।