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14-Mar-2026 01:09 PM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। पिछले 14 महीनों में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) और आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 232 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। औसतन हर डेढ़ दिन में भ्रष्टाचार का एक नया मामला दर्ज हुआ है।
इन मामलों में घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई करने के आरोप शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, 150 से अधिक मामलों में रिश्वतखोरों की गिरफ्तारी भी की गई है। इसके बावजूद छापेमारी के दौरान आरोपितों के पास से लाखों रुपये नकद और करोड़ों रुपये के आभूषण बरामद हो रहे हैं।
जनवरी 2025 से अब तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 152, विशेष निगरानी इकाई ने 37 और आर्थिक अपराध इकाई ने 43 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में आईएएस से लेकर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, वरिष्ठ इंजीनियर, अंचलाधिकारी, राजस्व पदाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी तक जांच के दायरे में आए हैं।
साल 2026 में अब तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 30 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 26 ट्रैप केस, तीन आय से अधिक संपत्ति और एक पद के दुरुपयोग से जुड़ा मामला शामिल है। वहीं, एसवीयू ने आय से अधिक संपत्ति के एक मामले और घूसखोरी से जुड़े नौ ट्रैप केस सहित कुल 10 मामले दर्ज किए हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के मामले में जांच एजेंसियों ने रिकॉर्ड भी बनाया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पिछले वर्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ 122 प्राथमिकी दर्ज की थीं, जो पिछले 25 वर्षों के औसत मामलों से करीब डेढ़ गुना और पिछले सात वर्षों के औसत से लगभग दोगुना है। एक ही दिन में चार अलग-अलग मामलों में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
इसके अलावा एसवीयू ने भी पिछले चार-पांच वर्षों की तुलना में कार्रवाई का नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025 से अब तक आय से अधिक संपत्ति के 16 और घूसखोरी के 21 मामलों में ट्रैप कार्रवाई की जा चुकी है।