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11-Mar-2026 08:39 AM
By First Bihar
Bihar News : बिहार सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से जुड़े लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सभी विभागों को पूरी जांच प्रक्रिया अपनाते हुए आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार करने का आदेश दिया गया है, ताकि दोषी अधिकारियों पर समय पर कार्रवाई हो सके।
इस संबंध में सरकार के महानिदेशक एवं मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने सभी विभागों को पत्र जारी किया है। यह पत्र सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), प्रधान मुख्य वन संरक्षकों, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षकों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और आरक्षी अधीक्षकों को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की प्रक्रिया को अधिक मजबूत और व्यवस्थित बनाया जाए।
हाल के दिनों में राज्य की जांच एजेंसियों द्वारा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर ट्रैप और आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों में दोषी अधिकारियों को उचित दंड दिलाने के लिए आपराधिक मुकदमों के साथ-साथ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी तय समय सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए। इसके लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए।
सरकार की ओर से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में जांच अधिकारी आरोप पत्र तैयार करने में जल्दबाजी और लापरवाही बरतते हैं। करीब 99 प्रतिशत मामलों में यह पाया गया है कि जैसे ही ट्रैप या आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज होता है, तुरंत आरोप पत्र गठित कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में केवल रंगे हाथों पकड़े जाने की घटना या प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के आधार पर आरोप तय कर दिए जाते हैं।
सरकार का कहना है कि इस तरह के आरोप पत्र बाद में अनुशासनिक कार्रवाई के दौरान कमजोर पड़ जाते हैं। जांच अधिकारी को निष्कर्ष तक पहुंचने में कठिनाई होती है, क्योंकि आरोप पत्र का आधार केवल प्राथमिकी या ट्रैप की घटना होती है। इसलिए निर्देश दिया गया है कि ट्रैप मामलों में केवल घटना के आधार पर आरोप पत्र का गठन नहीं किया जाए, बल्कि पूरी जांच के बाद ही चार्जशीट तैयार की जाए।
नए निर्देश के तहत रिश्वतखोरी की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों की एक टीम गठित की जाएगी। यह टीम आरोपी अधिकारी के पूरे कार्य-कलापों की जांच करेगी। जिस काम को लेकर रिश्वतखोरी की प्राथमिकी दर्ज हुई है, उससे जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। साथ ही आरोपी अधिकारी के कार्यालय से सभी जरूरी दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां भी ली जाएंगी।
यदि ट्रैप करने वाली जांच इकाई ने किसी सरकारी दस्तावेज को जब्त किया है, तो उसकी सत्यापित प्रति भी तुरंत प्राप्त की जाएगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कहीं प्रशासनिक चूक या सरकारी सेवक आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। ऐसे सभी बिंदुओं को आरोप पत्र का हिस्सा बनाना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसी द्वारा तैयार किए गए प्री-ट्रैप और पोस्ट-ट्रैप मेमोरेंडम तथा प्राथमिकी को केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में माना जाएगा। इन्हें ही आधार बनाकर आरोप पत्र तैयार नहीं किया जाएगा। इसी तरह आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी विस्तृत जांच के बाद ही आरोप पत्र का गठन किया जाएगा।
इसके अलावा संबंधित अधिकारी द्वारा हर साल दाखिल की जाने वाली संपत्ति विवरणी की भी जांच की जाएगी। जांच एजेंसियों द्वारा प्राथमिकी में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें अधिकारी ने अपनी वार्षिक संपत्ति विवरणी में दर्ज किया है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच अधिक प्रभावी होगी और दोषियों को सजा दिलाने में आसानी होगी।