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21-Mar-2026 11:05 AM
By First Bihar
BIHAR NEWS : बिहार में बीते कुछ महीनों के दौरान भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने आम जनता ही नहीं बल्कि जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। सरकारी विभागों में कार्यरत कई अधिकारियों के पास उनकी आय से कहीं अधिक संपत्ति मिलने के बाद यह साफ हो गया है कि सिस्टम के अंदर भ्रष्टाचार किस कदर जड़ें जमा चुका है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU), विशेष सतर्कता इकाई (SVU) और निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई में बड़े खुलासे हो रहे हैं।
सबसे चर्चित मामला 18 मार्च का है, जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के सात ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान जो कुछ मिला, उसने सभी को चौंका दिया। रजक के पास से 31 जमीनों के दस्तावेज, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, कई बैंक खाते, मकान, और यहां तक कि दार्जिलिंग से नेपाल तक फैली जमीन के सबूत बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि उनकी संपत्ति उनकी वैध आय से कई गुना अधिक है। फिलहाल उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
इसके पहले 13 मार्च को विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने एक अन्य लोकसेवक पंकज कुमार के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान उनके घर से करीब 32 लाख रुपये नकद और 1 करोड़ 31 लाख रुपये के हीरे, सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए गए। छापेमारी के दौरान आरोपी ने खुद को बचाने के लिए जेवरात छिपाने और फेंकने की कोशिश भी की, लेकिन टीम की सतर्कता से सभी सामान जब्त कर लिया गया। इसके अलावा कई जमीनों के कागजात भी बरामद हुए हैं, जो उनकी अवैध संपत्ति की ओर इशारा करते हैं।
पश्चिमी चंपारण के बेतिया में भी भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया था। यहां जिला शिक्षा परियोजना के सहायक अभियंता रोशन कुमार को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से 42.5 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद उनकी संपत्ति की भी जांच शुरू कर दी गई है।
पटना में 2 फरवरी को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सहायक निदेशक परमजय कुमार को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि उन्होंने 10 लाख रुपये की मांग की थी और पहली किस्त लेते समय ही उन्हें पकड़ लिया गया। उनकी कार से नोटों के कई बंडल बरामद हुए, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यह भ्रष्टाचार लंबे समय से चल रहा था।
वहीं मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता अमन कुमार को भी रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पेवर ब्लॉक निर्माण के भुगतान को आगे बढ़ाने के लिए उनसे 9,000 रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए निगरानी टीम ने आरोपी को दबोच लिया।
इन सभी मामलों ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध संपत्ति कैसे जमा हो रही है। लगातार हो रही छापेमारी से यह संकेत जरूर मिला है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।