Bihar News: बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के पेपरलीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े आरोपी के खिलाफ आर्थिक जांच एजेंसी ने शिकंजा कसते हुए करीब दो करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। इस कार्रवाई से भर्ती परीक्षाओं में धांधली और कथित अवैध कमाई के मामलों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि पेपरलीक के जरिए हासिल की गई रकम कहां-कहां निवेश की गई और इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका रही है।
सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपरलीक का मामला सामने आने के बाद अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर काफी विवाद हुआ था। परीक्षा की तैयारी में दिन-रात मेहनत करने वाले हजारों युवाओं के लिए ऐसे मामले बड़ा झटका होते हैं। अब इस मामले में ईडी की कार्रवाई ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। करीब दो करोड़ रुपये की संपत्तियों की जब्ती को कथित अवैध कमाई के खिलाफ एजेंसी की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
जांच में जिस कंपनी का नाम सामने आया है, वह एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड है। ईडी के मुताबिक, इस कंपनी का नियंत्रण और वास्तविक लाभकारी स्वामित्व कौशिक कुमार कर के पास है। एजेंसी ने इसी कंपनी के नाम पर दर्ज पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य 2.01 करोड़ रुपये बताया गया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
पेपर छापने के ठेके से शुरू हुई जांच
ईडी की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 420, 467 और 468 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत आरोप दर्ज किए गए थे। जांच में प्रश्नपत्र लीक करने से जुड़े टेलीग्राम लिंक, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की भूमिका भी सामने आई थी।
ईओयू ने 22 अगस्त 2024 को इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपपत्र के अनुसार, ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक कौशिक कुमार कर पर कथित तौर पर साजिश रचकर भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि कैल्टेक्स के पास प्रश्नपत्र छापने का पूर्व अनुभव नहीं था और न ही उसकी अपनी प्रिंटिंग प्रेस थी। इसके बावजूद उसे सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल, बिहार से प्रश्नपत्र छापने का ठेका मिल गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की वास्तविक भूमिका छिपाने की कोशिश की गई। इस कंपनी को पहले भी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़े कथित मामलों के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था।
5.9 करोड़ रुपये के भुगतान में 2.01 करोड़ का मामला
ईडी की जांच में पैसों के लेन-देन को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र छापने के काम के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को 5.9 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान किया गया था। आरोप है कि इस रकम का केवल एक हिस्सा ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया, जबकि 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिए गए।
जांच में कोलकाता स्थित ऐसी कंपनियों का नेटवर्क सामने आने की बात कही गई है, जिनका वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं होने का संदेह है। ईडी का आरोप है कि कथित अवैध रकम को फर्जी लेन-देन के जरिए अलग-अलग कंपनियों में भेजा गया और बाद में नकदी में बदल दिया गया। इससे पैसे के वास्तविक स्रोत और उसके आगे के इस्तेमाल का पता लगाना मुश्किल हो गया।
जब एजेंसी को कथित अपराध से हासिल रकम का आगे पता नहीं चला, तब उसने उसी मूल्य के बराबर पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई की।
परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुआ था अभ्यर्थियों का भविष्य
बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस घटनाक्रम से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई और परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को निराशा का सामना करना पड़ा। एक भर्ती परीक्षा के पीछे युवाओं की महीनों की मेहनत, समय और पैसा लगा होता है। ऐसे में पेपरलीक का मामला केवल परीक्षा व्यवस्था की खामी नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के भरोसे से भी जुड़ा है।
अब ईडी की कार्रवाई के बाद मामले का आर्थिक पहलू भी जांच के केंद्र में है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध रकम किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और इसमें अन्य कंपनियों या लोगों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल पांच संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान पैसों के लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं पर और जानकारी सामने आ सकती है।