Bihar Education News :  बिहार के विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत प्राध्यापकों के लिए बड़ी राहत और नई जिम्मेदारी दोनों साथ आई हैं। लंबे समय से लंबित प्रोन्नति प्रक्रिया अब जल्द शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन ने कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS)-2026 नियमावली को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है।


नई नियमावली के तहत अब शिक्षकों की पदोन्नति केवल सेवा अवधि के आधार पर नहीं होगी, बल्कि उनके वास्तविक शैक्षणिक प्रदर्शन, शोध कार्य और शिक्षण गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब प्रोन्नति के लिए किसी भी शिक्षक को कम से कम 70 प्रतिशत कक्षाएं लेना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा और शिक्षकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।


काम के आधार पर मिलेगी पदोन्नति

CAS-2026 के तहत सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। शिक्षकों के शिक्षण कार्य, शोध पत्रों के प्रकाशन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी, रिसर्च स्कोर और प्रशासनिक योगदान का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा।


यदि कोई शिक्षक 80 प्रतिशत या उससे अधिक कक्षाएं लेता है तो उसे उत्कृष्ट ग्रेड मिलेगा, जबकि 70 से 80 प्रतिशत के बीच कक्षाएं लेने पर संतोषजनक ग्रेड दिया जाएगा। 70 प्रतिशत से कम कक्षाएं लेने वाले शिक्षकों को प्रोन्नति में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।


APAR और चयन समिति की भूमिका होगी अहम

नई व्यवस्था में प्रत्येक स्तर की पदोन्नति के लिए संबंधित वर्षों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (APAR) में संतोषजनक या अच्छा ग्रेड होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्क्रीनिंग-सह-चयन समिति की अनुशंसा के बाद ही पदोन्नति मिल सकेगी।शिक्षकों के प्रशासनिक दायित्व, पाठ्येतर गतिविधियों में योगदान और शोध कार्यों को भी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। यानी अब केवल वरिष्ठता नहीं, बल्कि समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन भी प्रोन्नति का आधार बनेगा।


शोध कार्यों को मिलेगा अधिक महत्व

CAS-2026 में शोध कार्यों को विशेष महत्व दिया गया है। पीएचडी शोधार्थियों का सफल मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों को 10 अंक दिए जाएंगे, जबकि एमफिल अथवा पीजी शोधार्थियों के मार्गदर्शन पर 2 अंक मिलेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्र भी प्रोन्नति के लिए महत्वपूर्ण होंगे।


लेवल-10 से लेवल-11 तक की शर्तें

सहायक प्रोफेसर (लेवल-10) से सीनियर स्केल (लेवल-11) में पदोन्नति के लिए पीएचडी धारकों को चार वर्ष, एमफिल या पीजी डिग्री धारकों को पांच वर्ष तथा बिना पीएचडी वाले शिक्षकों को छह वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी।इसके साथ ही 21 दिन का ओरिएंटेशन कोर्स, कम से कम पांच दिन का रिफ्रेशर या रिसर्च वर्कशॉप और यूजीसी सूचीबद्ध अथवा पीयर-रिव्यू जर्नल में कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित होना अनिवार्य रहेगा।


लेवल-11 से लेवल-12 तक की शर्तें

सीनियर स्केल (लेवल-11) से सिलेक्शन ग्रेड (लेवल-12) में पदोन्नति के लिए शिक्षक को लेवल-11 में पांच वर्ष की सेवा, पीएचडी, पिछले पांच वर्षों में कम से कम 10 दिन का रिफ्रेशर कोर्स और तीन शोध पत्रों का प्रकाशन आवश्यक होगा।


लेवल-12 से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के नियम

सिलेक्शन ग्रेड (लेवल-12) से एसोसिएट प्रोफेसर (लेवल-13ए) बनने के लिए शिक्षक को तीन वर्ष की सेवा, पीएचडी, निर्धारित रिफ्रेशर और एमओओसी (MOOCs) कोर्स पूरा करना होगा। इसके अलावा सात शोध प्रकाशन, कम से कम एक पीएचडी शोधार्थी का मार्गदर्शन और 70 का न्यूनतम रिसर्च स्कोर भी जरूरी होगा।


प्रोफेसर बनने के लिए क्या होंगे मानक

एसोसिएट प्रोफेसर (लेवल-13ए) से प्रोफेसर (लेवल-14) पद पर पदोन्नति के लिए शिक्षक को तीन वर्ष की सेवा, पीएचडी, 10 शोध प्रकाशन, कम से कम एक पीएचडी शोधार्थी का सफल मार्गदर्शन और 110 का न्यूनतम रिसर्च स्कोर हासिल करना होगा।


शिक्षा व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव

उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि CAS-2026 लागू होने से बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षण एवं शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से अटकी प्रोन्नतियां शुरू होने के साथ-साथ अब शिक्षकों को नियमित कक्षाएं लेने, शोध कार्य करने और अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल पदोन्नति देना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत बनाना भी है।