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05-Mar-2026 09:30 AM
By First Bihar
Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। जैसे ही यह चर्चा सार्वजनिक हुई, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अंदर भी विरोध के स्वर खुलकर सामने आने लगे। बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए प्रशासन ने मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा कड़ी कर दी है। सीएम हाउस के दोनों मुख्य गेटों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, वहीं आसपास के इलाकों में भी पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
बताया जा रहा है कि स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है और आने-जाने वालों की सख्ती से जांच की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि पूरा इलाका किसी पुलिस छावनी जैसा नजर आ रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध प्रदर्शन को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
दरअसल, बुधवार से यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। इसी संभावना ने जदयू कार्यकर्ताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है।
गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुटने लगे। “नीतीश कुमार जिंदाबाद” और “हमारा नेता कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंजता रहा। कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ही स्वीकार हैं। उनका तर्क है कि जनता ने जिस नेतृत्व पर भरोसा जताया है, उसी को आगे भी राज्य की कमान संभालनी चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर मौजूद एक जदयू कार्यकर्ता ने कहा कि वे पटना के रहने वाले हैं और खबर सुनते ही यहां पहुंच गए। उन्होंने कहा, “बुधवार दोपहर से यह खबर चल रही है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाया जा रहा है। यह सुनकर हम सभी यहां आए हैं। हम साफ कहना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार के अलावा कोई और हमें स्वीकार नहीं है।”
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार की जनता ने विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व को ही जनादेश दिया था। ऐसे में अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाकर राज्यसभा भेजने की कोशिश होती है, तो इसका विरोध होगा। कई कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ होगा। लगभग दो दशकों से राज्य की सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार का सक्रिय प्रशासनिक भूमिका से हटना सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। इससे एनडीए के अंदर भी नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
फिलहाल आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। जदयू के कई नेताओं का कहना है कि अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार ही लेंगे। वहीं विपक्ष भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इसे लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
इधर, मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुटी भीड़ और बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी ने पटना का माहौल गरमा दिया है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह महज अटकलें हैं या सच में बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव होने वाला है। फिलहाल सीएम हाउस के बाहर सियासी तापमान चढ़ा हुआ है और राजधानी की फिज़ा में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है।