Bihar News : बिहार में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI के अधिकारों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चर्चाओं पर अब पुलिस मुख्यालय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने साफ कहा है कि CBI के अधिकारों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। गृह विभाग की ओर से 3 सितंबर को जारी अधिसूचना को लेकर सामने आई उन खबरों को भी पुलिस मुख्यालय ने भ्रामक और निराधार बताया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राज्य सरकार ने CBI की जांच के अधिकारों को लेकर कोई बड़ा नीतिगत बदलाव किया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, नई अधिसूचना का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था को बदलना नहीं, बल्कि उसे वर्तमान कानूनों के अनुरूप अपडेट करना है। खास तौर पर देश में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों को ध्यान में रखते हुए अधिसूचना को संशोधित किया गया है।
3 सितंबर की अधिसूचना को लेकर क्यों मचा था भ्रम?
गृह विभाग की ओर से 3 सितंबर को जारी अधिसूचना में कहा गया था कि यह इस विषय पर पहले जारी सभी अधिसूचनाओं का स्थान लेगी। इसके बाद CBI की जांच और राज्य में उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर अलग-अलग तरह की रिपोर्ट सामने आने लगीं।
इन रिपोर्टों के आधार पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या बिहार में CBI को राज्य सरकार या उसके अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच के लिए पहले से अलग प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। इसी भ्रम को दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी की।
पुलिस मुख्यालय ने कहा कि पहले से प्रभावी वैधानिक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी CBI के अधिकारों को लेकर जो व्यवस्था पहले लागू थी, उसमें कोई मूलभूत बदलाव नहीं हुआ है।
नए आपराधिक कानूनों के कारण हुआ अपडेट
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि देश में वर्ष 2023 में नए आपराधिक कानून लागू किए गए। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम शामिल हैं। पुराने कानूनों के स्थान पर लागू इन नए कानूनों को मौजूदा वैधानिक व्यवस्था में शामिल करना जरूरी था।
इसी वजह से नई अधिसूचना में संबंधित कानूनों और कानूनी प्रावधानों को अपडेट किया गया है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी IT Act जैसे आधुनिक कानूनों को भी सहमति के दायरे में शामिल किया गया है।
1996 के बाद किया गया अहम अपडेट
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, CBI की शक्तियों और उसके अधिकार क्षेत्र से संबंधित प्रावधानों को समय-समय पर कानूनों के अनुरूप अपडेट किया जाता रहा है। इससे पहले इस विषय में महत्वपूर्ण अधिसूचना वर्ष 1996 में जारी की गई थी।
करीब तीन दशक बाद बदलते कानूनी ढांचे और नए आपराधिक कानूनों को ध्यान में रखते हुए अधिसूचना को अपडेट किया गया। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि इसे अधिकारों में कटौती या विस्तार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों पर भी पुलिस मुख्यालय ने दी सफाई
पुलिस मुख्यालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया, जिनमें इस कदम को बिहार सरकार और CBI के बीच टकराव या CBI के खिलाफ किसी बड़े फैसले के तौर पर पेश किया गया था। मुख्यालय ने ऐसी खबरों को निराधार और भ्रामक बताया।
इस स्पष्टीकरण के बाद फिलहाल यह साफ हो गया है कि 3 सितंबर की अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य CBI के अधिकारों में बदलाव करना नहीं, बल्कि पुराने प्रावधानों को मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप अपडेट करना है।
यानी, CBI के अधिकारों को लेकर जिस बड़े बदलाव की चर्चा हो रही थी, बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है।