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27-Feb-2026 07:39 AM
By First Bihar
Bihar CAG Report : बिहार में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने कई विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) सहित अन्य योजनाओं में 2017-18 से 2023-24 तक हुई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच चार जिलों में 21 ऐसे परिवारों को आवास स्वीकृत किया गया, जिनके पास पहले से ही पक्का मकान था। इन्हें कुल 24.30 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा, नाबालिगों को भी आवास स्वीकृत किया गया, जबकि उनके माता-पिता जीवित थे। इस पर उन्हें 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, कई पात्र परिवार ऐसे भी थे, जिन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
सीएजी रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि योजना के निगरानी तंत्र में कई खामियां थीं। 55 मामलों में देखा गया कि ग्राम पंचायत से लेकर जिले और राज्य के बाहर तक आवासों की जियो-टैगिंग की गई। 961 पूर्ण आवासों में से 541 में शौचालय का निर्माण नहीं किया गया।
वित्तीय गड़बड़ियों का भी खुलासा हुआ। 1,635 लाभार्थियों के नाम आवास साफ्ट प्लेटफार्म और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) में अलग-अलग दर्ज थे, लेकिन उन्हें कुल 19.37 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई राशि को राज्य सरकार 14 से 154 दिनों तक विलंब से नोडल खाते में हस्तांतरित करती रही, जिससे 71.08 करोड़ रुपये का ब्याज देयता उत्पन्न हुआ।
भूमिहीन लाभार्थियों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। 20,000 लाभार्थियों में से केवल 3,462 को मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना के तहत भूमि क्रय के लिए सहायता मिली। वहीं, 2,935 लाभार्थियों को ही पीएमएवाई-जी के तहत आवास स्वीकृत किए गए।
ग्रामीण विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली में रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि योजना के क्रियान्वयन में समग्र निगरानी और वित्तीय प्रबंधन में गहरी खामियां हैं। विशेषकर, पात्र और अपात्र लाभार्थियों का स्पष्ट विभाजन नहीं किया गया, जिससे वित्तीय और सामाजिक न्याय दोनों प्रभावित हुए हैं।
सीएजी रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार, आवश्यक है कि राज्य सरकार योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाए और पात्र लाभार्थियों तक सही तरीके से सहायता सुनिश्चित करे। इसके अलावा, जियो-टैगिंग, शौचालय निर्माण और वित्तीय भुगतान में सुधार किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इसी तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
इस रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि केवल योजनाओं का घोषणात्मक क्रियान्वयन पर्याप्त नहीं है; उन्हें प्रभावी निगरानी, नियमित ऑडिट और समय पर वित्तीय हस्तांतरण के साथ लागू करना अत्यंत आवश्यक है। सीएजी की रिपोर्ट ने राज्य सरकार के लिए चेतावनी के रूप में काम किया है, जिसमें ग्रामीण विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति और उनकी जवाबदेही को उजागर किया गया है।
कुल मिलाकर, बिहार में पीएमएवाई-जी समेत अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ी, पात्रता में त्रुटियां और निर्माण कार्य में कमी साफ दिखाई दे रही है। अब राज्य सरकार के सामने चुनौती है कि वह इन अनियमितताओं को दूर कर योजना के लाभ को वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोके।