Bihar News : बिहार सरकार ने पंचायत व्यवस्था को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 31 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगी। इनमें सबसे अहम फैसला ग्राम पंचायतों को कर (टैक्स), शुल्क और दर वसूलने का अधिकार देने तथा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन कराने का है।


मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन निर्णयों का उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और विकास योजनाओं को जनसंख्या के अनुरूप लागू करना है।


पंचायतें अब खुद जुटा सकेंगी राजस्व

कैबिनेट ने "ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026" के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इस नियमावली के लागू होने के बाद राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क वसूलने का कानूनी अधिकार मिलेगा।नई व्यवस्था के तहत पंचायतें होल्डिंग पर दखलकार कर, पंचायत क्षेत्र में संचालित पेशा, व्यापार और उद्योग पर निर्धारित शुल्क, पंचायत की ओर से दी जाने वाली सेवाओं पर शुल्क तथा अन्य स्वीकृत शुल्क वसूल सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों की अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वे छोटी-बड़ी विकास योजनाओं के लिए पूरी तरह सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहेंगी।


पहली बार बनी स्पष्ट नियमावली

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि बिहार में पहली बार पंचायतों के लिए कर और शुल्क वसूली की विस्तृत नियमावली तैयार की गई है। अब तक पंचायतों के पास इस संबंध में कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं थी। नई नियमावली में अधिकतम कर एवं शुल्क की सीमा तय की गई है। इसी सीमा के भीतर पंचायतें स्थानीय परिस्थितियों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर लगाने का निर्णय ले सकेंगी। इससे वित्तीय अनुशासन भी बना रहेगा और पंचायतों को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।


2011 की जनसंख्या के आधार पर होगा नया परिसीमन

कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला पंचायतों के परिसीमन से जुड़ा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानते हुए ग्राम पंचायत क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि समय के साथ कई पंचायतों की आबादी में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में नई जनसंख्या के अनुरूप पंचायतों की सीमाएं तय होने से स्थानीय प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचेगा।इसके साथ ही प्रशासनिक कार्यों में दक्षता आएगी, विकास कार्यों का क्षेत्रीय संतुलन बेहतर होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसुविधाओं की उपलब्धता भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।


खनन नियमों में भी बड़ा बदलाव

कैबिनेट ने बिहार खनिज (समाहारण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) द्वितीय संशोधन नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत खनन क्षेत्रों की ई-नीलामी में अधिक संख्या में बोलीदाता भाग ले सकेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकार को अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा बड़े पहाड़ी क्षेत्रों को छोटे-छोटे ब्लॉक में विभाजित कर खनन पट्टे दिए जाएंगे। वहीं स्टोन क्रशर लगाने के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले खनन क्षेत्र की 500 मीटर की परिधि में क्रशर लगाने का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 2 किलोमीटर कर दिया गया है।


जेल कर्मियों को राहत, बंदियों के परिजनों के लिए बनेगी नीति

मंत्रिपरिषद ने राज्य की जेलों में कार्यरत भूतपूर्व सैनिक सह कक्षपालों के मासिक मानदेय में भी बढ़ोतरी का फैसला लिया है। अब उन्हें 19,800 रुपये के स्थान पर 30,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसके अलावा जेल में बंद किसी कैदी की प्राकृतिक मृत्यु, प्राकृतिक आपदा के कारण आकस्मिक मृत्यु या अप्राकृतिक कारणों से मौत होने की स्थिति में उसके आश्रितों या निकटतम परिजनों को मुआवजा देने के लिए अलग नीति बनाई जाएगी। इस संबंध में गृह विभाग (कारा) विस्तृत नीति तैयार करेगा।


ग्रामीण प्रशासन को मिलेगी नई मजबूती

सरकार का मानना है कि इन फैसलों से बिहार की पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनेंगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। वहीं नए परिसीमन से जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा और पंचायत प्रशासन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। इसके साथ ही खनन, जेल प्रशासन और राजस्व व्यवस्था से जुड़े फैसलों का भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिलेगा।