PATNA : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की बार-बार की गई अपील को बिहार की सत्ताधारी एनडीए सरकार ने बुधवार को खुलेआम रौंद दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए 32 मंत्रियों ने करीब 90 सरकारी गाड़ियों का भारी-भरकम काफिला इस्तेमाल किया। जबकि सचिवालय से उनके आवास की दूरी 100-200 मीटर है.
32 मंत्रियों का 90 गाड़ियों का काफिला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज मुख्य सचिवालय में कैबिनेट बैठक बुलाई थी। मुख्यमंत्री निवास समेत सभी मंत्रियों के बंगले मुख्य सचिवालय से महज 100-200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और बाकी 30 मंत्री अपने-अपने आवास से अलग-अलग गाड़ियों में पहुंचे। कोई भी मंत्री पैदल या एक गाड़ी शेयर करके नहीं आया। हर मंत्री के साथ पायलट, एस्कॉर्ट और स्टाफ वाहन शामिल थे, जिससे कुल वाहनों की संख्या लगभग 90 तक पहुंच गई।
पीएम की अपील की धज्जियाँ उड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में कई बार लोगों को संबोधित करते हुए पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है। उन्होंने जनता से सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और छोटी दूरी पैदल तय करने जैसे उपाय अपनाने को कहा था, ताकि आयात बिल कम हो, विदेशी मुद्रा बच सके और पर्यावरण की रक्षा हो।
अपने ही नेताओं पर मोदी का कंट्रोल नहीं
लेकिन बिहार में सत्तारूढ़ भाजपा-जद(यू) गठबंधन सरकार के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री की इस अपील को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। बैठक स्थल के बाहर लंबी लाइन में खड़ी लग्जरी कारें, एसयूवी और पायलट वाहनों ने न सिर्फ ट्रैफिक जाम किया, बल्कि सरकारी खर्च और ईंधन की बर्बादी का जीता-जागता उदाहरण पेश किया।
विपक्षी पार्टियों ने हमला बोला
विपक्षी दलों ने इस घटना की तीखी आलोचना की है। बिहार आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा, “जब प्रधानमंत्री खुद देश से ईंधन बचाने की गुजारिश कर रहे हैं, तो उनकी अपनी पार्टी की सरकार बिहार में ईंधन को पानी की तरह बहा रही है। मंत्रियों के बंगले से सचिवालय की दूरी क्रिकेट पिच से भी कम है। अगर वे 200 मीटर पैदल नहीं चल सकते, तो आम आदमी से क्या उम्मीद रखी जा सकती है?”
सरकार नहीं दे पा रही सफाई
इस घटना ने केंद्र की ऊर्जा संरक्षण मुहिम और राज्य सरकारों के व्यावहारिक आचरण के बीच गहरी खाई को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में भाजपा की सहयोगी सरकार द्वारा ऐसा व्यवहार राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन सकता है।सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। हालांकि बीजेपी के एक नेता ने कहा कि “मंत्रियों की आवाजाही प्रोटोकॉल और सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार हुई है।” जब पूछा गया कि इतनी कम दूरी के लिए इतने वाहनों की जरूरत क्यों पड़ी, तो कोई जवाब नहीं मिला।
आम लोगों में हो रही चर्चा
सोशल मीडिया पर इस घटना पर जोरदार चर्चा हो रही है। #BiharCabinetFuelWaste और #ModiAppealIgnored जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। आम नागरिकों ने सचिवालय के बाहर खड़ी दर्जनों गाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर सरकार से सवाल किया है कि क्या प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ आम आदमी के लिए है?
बिहार में VIP कल्चर
यह पहली बार नहीं है जब वीआईपी संस्कृति और ईंधन बर्बादी की घटनाएं सामने आई हैं। कई राज्यों में मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा छोटी दूरी के लिए बड़े काफिले का इस्तेमाल पहले भी आलोचना का विषय बन चुका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सत्ताधारी दल के नेता और मंत्री रोजमर्रा के कामकाज में उदाहरण नहीं बनेंगे, तो प्रधानमंत्री की अपील का नैतिक बल कमजोर पड़ जाएगा।अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या भाजपा प्रदेश इकाई की ओर से इस मामले में कोई सफाई या माफी नहीं दी गई है।
कैबिनेट बैठक में विकास कार्यों पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, लेकिन 100-200 मीटर की दूरी पर 90 गाड़ियों का काफिला पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है।अब बिहार की जनता देख रही है कि सरकार प्रधानमंत्री की अपील को सिर्फ भाषण तक सीमित रखेगी या व्यावहारिक रूप से भी इसका पालन करेगी।