Bihar News : बिहार में आम यात्रियों को जल्द ही महंगाई का एक और झटका लग सकता है। राज्य के परिवहन विभाग ने बस किराये में बढ़ोतरी को लेकर बड़ा प्रस्ताव जारी किया है। गुरुवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक दूरी के आधार पर किराये में 10% से लेकर 15% तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। इस फैसले के लागू होने के बाद राज्य में बस से सफर करना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा।


परिवहन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार 50 किलोमीटर तक की यात्रा पर किराये में 15% की वृद्धि की जाएगी। वहीं 100 किलोमीटर तक के लिए 14%, 150 किलोमीटर तक 13%, 200 किलोमीटर तक 12%, 250 किलोमीटर तक 11% और 300 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए 10% तक किराया बढ़ाने की योजना है। यानी कम दूरी के यात्रियों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा, जबकि लंबी दूरी पर बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रखी गई है।


विभाग ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से एक महीने के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसके बाद ही नई दरों को लागू किया जाएगा, ताकि यात्रियों और बस संचालकों दोनों के हितों का संतुलन बना रहे।


बिहार राज्य मोटर फेडरेशन के प्रवक्ता कामेश्वर महतो ने बताया कि परिवहन विभाग हर पांच साल में बस किराये की समीक्षा करता है। इसी प्रक्रिया के तहत यह प्रस्ताव लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर फेडरेशन की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।


अगर प्रस्ताव लागू होता है तो मुजफ्फरपुर से कई प्रमुख शहरों के बीच किराया बढ़ जाएगा। उदाहरण के तौर पर मुजफ्फरपुर से दरभंगा का किराया 110 रुपये से बढ़कर 125 रुपये हो सकता है। इसी तरह सीतामढ़ी का किराया 100 से 115 रुपये, पटना का 130 से 150 रुपये, मोतिहारी का 150 से 175 रुपये, समस्तीपुर का 120 से 140 रुपये और बेतिया का 250 से 290 रुपये तक पहुंच सकता है।


हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। यात्रियों का कहना है कि पिछले पांच सालों में कई बार बस किराये में बढ़ोतरी की गई है। खासकर जब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ, निजी बस संचालकों ने अपने स्तर पर किराया बढ़ा दिया। कई बार मनमाने तरीके से किराया बढ़ाया गया, लेकिन इस पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं हुई।


गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2021 में बस किराये की दरों की समीक्षा की गई थी और अब 2026 में फिर से बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया है। ऐसे में लोगों को डर है कि सरकारी मंजूरी मिलने के बाद निजी बस ऑपरेटर एक बार फिर किराये में और बढ़ोतरी कर सकते हैं।


अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना बस से सफर करते हैं। छात्रों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि परिवहन विभाग लोगों के सुझावों को किस हद तक शामिल करता है और अंतिम फैसला क्या होता है।