Bihar News : बिहार में पुलों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। राज्य सरकार पुलों की सेहत की जांच के लिए सेटेलाइट तकनीक अपनाने की तैयारी में जुट गई है। इस नई व्यवस्था के तहत पुलों की स्थिति पर अंतरिक्ष से नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। पथ निर्माण विभाग ने इस दिशा में इजराइल के विशेषज्ञों से संपर्क किया है और तकनीकी अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दरअसल, हाल के महीनों में बिहार के कई महत्वपूर्ण पुलों में दरार और क्षति की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन गंगा नदी में गिरने की घटना के बाद विभाग ने पुलों की नियमित निगरानी को लेकर गंभीर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में इजराइली विशेषज्ञों और बिहार के अभियंताओं के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सेटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली और इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक सेटेलाइट तकनीक के जरिए पुलों की बेहद सूक्ष्म गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किया जा सकता है। इसमें रडार इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसके माध्यम से मिलीमीटर स्तर तक के झुकाव, कंपन और संरचनात्मक बदलावों का पता लगाया जा सकता है। कई बार पुलों में शुरुआती दरारें या हल्की संरचनात्मक कमजोरी सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देती, लेकिन सेटेलाइट तकनीक उन्हें पहले ही पहचान सकती है। इससे बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि यह तकनीक सफल साबित होती है, तो बिहार देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां पुलों की निगरानी अंतरिक्ष तकनीक से की जाएगी। विभाग फिलहाल इसके तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इधर बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने भी पुलों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। निगम ने तय किया है कि अब राज्य के सभी पुलों का साल में दो बार अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। इसी अभियान के तहत राज्यभर के करीब चार हजार पुलों की जांच की जा चुकी है। शुरुआती रिपोर्ट में किसी बड़े खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई पुलों की मरम्मत और निगरानी की जरूरत महसूस की गई है।
पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र ने कहा कि जिस तरह पुल निर्माण के दौरान अभियंताओं की टीम सक्रिय रहती है, उसी प्रकार पुलों के रखरखाव और नियमित निरीक्षण के लिए भी अलग जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभाग पुलों की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार कर रहा है, ताकि निरीक्षण प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि आईआईटी पटना ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के करीब आधा दर्जन पुलों की तत्काल मरम्मत की आवश्यकता बताई है। फरवरी 2026 में जमुई जिले के खैरा-सोनो मार्ग स्थित नरियाना-मांगोबंदर पुल पर आवागमन रोकना पड़ा था। इसके बाद 23 मई 2026 को गोपालगंज में गंडक नदी पर बने पुल के स्पैन में दरार आने से यातायात बाधित हो गया था। इन घटनाओं ने सरकार को पुल सुरक्षा के प्रति और सतर्क कर दिया है। अब सरकार की कोशिश है कि तकनीक के सहारे पुलों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखी जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना से पहले ही खतरे को पहचानकर जरूरी कदम उठाए जा सकें।\