राज्य में जमीन और मकान के निबंधन से जुड़े दस्तावेजों में होने वाली डिजिटल गलतियों को लेकर अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब निबंधन दस्तावेजों में हुई लिपिकीय, स्कैनिंग या डेटा एंट्री से जुड़ी त्रुटियों को तय समय सीमा के भीतर सुधारना अनिवार्य होगा।
3 से 7 दिन में होगी प्रारंभिक कार्रवाई
नई एसओपी के अनुसार, डिजिटल गलती सुधार की प्रक्रिया अब तय समयसीमा में पूरी की जाएगी। अलग-अलग स्तरों पर सुधार कार्य के लिए 3 से 7 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। प्रारंभिक जांच से लेकर भौतिक सत्यापन और अंतिम अनुमोदन तक पूरी प्रक्रिया को अधिकतम 22 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को भूमि और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड में तकनीकी गलतियों के कारण किसी तरह की परेशानी न हो।
विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी
इस संबंध में उप निबंधन महानिरीक्षक डॉ. संजय कुमार ने सभी प्रमंडलीय सहायक निबंधन महानिरीक्षक, जिला अवर निबंधक, अवर निबंधक और प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि एसओपी का अनुपालन सभी निबंधन कार्यालयों में तत्काल प्रभाव से अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, निबंधन पदाधिकारी को प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद प्रमंडलीय स्तर पर भौतिक सत्यापन, अनुमोदन और आदेश पारित करने के लिए भी 7 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है। वहीं विभागीय प्रभारी अधिकारी को प्राप्त आदेशों को 3 कार्य दिवस के भीतर आगे बढ़ाना होगा।
सिस्टम इंटीग्रेशन और डिजिटल सुधार प्रक्रिया
नई व्यवस्था में सिस्टम इंटीग्रेटर (SI) की भूमिका भी महत्वपूर्ण कर दी गई है। उन्हें सुरक्षित डिजिटल संशोधन के माध्यम से सभी सुधारों को 5 कार्य दिवस के भीतर सिस्टम में अपडेट करना होगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मूल दस्तावेज और संशोधित पीडीएफ दोनों सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड में रहें ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
कौन-कौन सी गलतियां होंगी ठीक
एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किन प्रकार की गलतियों को सुधारा जा सकेगा। इसमें टाइपिंग त्रुटि, नाम में गलती, खाता या खेसरा नंबर में गलत प्रविष्टि, स्कैनिंग के दौरान पेज कट जाना, अस्पष्ट दस्तावेज अपलोड होना, गलत पीडीएफ फाइल लग जाना या एक दस्तावेज के पेज दूसरे दस्तावेज में अपलोड हो जाना जैसी तकनीकी गलतियां शामिल हैं। सभी मामलों में हार्ड कॉपी, स्कैन पीडीएफ और मूल निबंधित दस्तावेज का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत संशोधन की संभावना समाप्त हो सके।
मूल दस्तावेज में बदलाव नहीं होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मूल निबंधन संख्या, तारीख और पक्षकार की विधिक स्थिति में किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि सुधार की आवश्यकता होती है तो इसके लिए सुधारात्मक डीड या कैंसिल डीड अलग से तैयार करनी होगी और उसे अलग दस्तावेज के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और केवल अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही संशोधन संभव होगा।
सख्त निगरानी और आईटी ऑडिट
नई प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संशोधन की त्रैमासिक रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। इसके अलावा वार्षिक आईटी ऑडिट को भी अनिवार्य कर दिया गया है ताकि पूरी डिजिटल प्रणाली की जांच समय-समय पर हो सके।साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का डेटा संशोधन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आईटी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
आम लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
इस नई एसओपी के लागू होने से आम जनता को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। अब जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेजों में होने वाली छोटी-छोटी गलतियों के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निर्धारित समय सीमा में सुधार होने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि पूरी निबंधन प्रणाली भी अधिक तेज और भरोसेमंद बनेगी।सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से डिजिटल रिकॉर्ड मैनेजमेंट मजबूत होगा और भूमि विवादों में भी कमी आने की संभावना है।