Revenue Department Bihar : बिहार सरकार ने भूमि सुधार और राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और जनता के अनुकूल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सोमवार को मुजफ्फरपुर में ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ आयोजित कर रहा है, जिसमें उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा खुद जमीन से जुड़े विवादों और शिकायतों को सुनेंगे। यह कदम उन समस्याओं के समाधान के लिए खास महत्व रखता है, जो वर्षों से जमीन के रिकॉर्ड और जमाबंदी में अनियमितताओं के कारण लटकी हुई थीं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय परिसर स्थित श्रीकृष्ण सिंह प्रेक्षागृह में आयोजित यह संवाद दो पालियों में होगा। सुबह की पाली में सीधे रैयत और आम जनता के सामने अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मी बैठेंगे। इस दौरान दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस की लंबित फाइलों, ई-मापी सेवाओं की अद्यतन स्थिति और अभियान बसेरा-2 के तहत भूमिहीनों को जमीन देने की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। आम नागरिकों से ऑनलाइन सेवाओं में आ रही तकनीकी समस्याओं पर फीडबैक भी लिया जाएगा, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाई जा सके।
संवाद में शामिल होने वाले शिकायतकर्ताओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज कराना जरूरी होगा, जिससे कार्रवाई की जानकारी एसएमएस के जरिए सीधे दी जा सके। दूसरी पाली दोपहर 3:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी, जिसमें डिप्टी सीएम स्वयं विभागीय समीक्षा करेंगे। इसमें जिले के अपर समाहर्ता, डीसीएलआर, भू-अर्जन और बंदोबस्त अधिकारी समेत सभी राजस्व अधिकारी मौजूद रहेंगे।
सरकार ने जमाबंदी सुधार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब जमीन मालिकों और रैयतों के लिए जमाबंदी में नाम, खाता, खेसरा या रकबा से जुड़ी गलतियों को सुधारने में लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से दाखिल किए गए आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा में करना अनिवार्य होगा। लिपिकीय या टाइपिंग जैसी छोटी गलतियों का निपटारा 15 कार्य दिवस में, तकनीकी राजस्व संबंधी त्रुटियों को 35 दिन में और जटिल मामलों को अधिकतम 75 कार्य दिवस में करना होगा।
राज्य में अब तक लगभग 4.50 करोड़ जमाबंदियां ऑनलाइन की जा चुकी हैं। डिजिटलीकरण के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्हें सुधारने के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल को पहले से अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा में काम न होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि देरी करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को भेजी जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी रैयत को अपनी ही जमीन के रिकॉर्ड के लिए परेशानी न हो।
यह पहल इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि जमीन विवाद बिहार की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियों में से एक रहे हैं। दाखिल-खारिज, सीमांकन और जमाबंदी की गलतियां अक्सर पीढ़ियों तक चलने वाले विवादों का कारण बनती हैं। सरकार का मानना है कि आमने-सामने संवाद, ऑनलाइन व्यवस्था और तय समय-सीमा से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
साथ ही, यह कदम रैयतों और जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब वे अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को सुधारने के लिए लंबे इंतजार में नहीं रहेंगे और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से रिपोर्टिंग, शिकायत निवारण और फीडबैक प्रणाली के जरिये जनता की सहभागिता बढ़ेगी। इसके अलावा, अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने से भू-अर्जन और जमीन से जुड़े मामलों में अनुशासन भी कड़ा होगा।
राज्य सरकार की यह पहल भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन में नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। यह न केवल विवादों के त्वरित समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी। भूमि सुधार जन कल्याण संवाद, जमाबंदी सुधार और डिजिटल पोर्टल के जरिए राज्य में रैयत और जमीन मालिकों को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी।
बिहार सरकार ने जमीन विवादों के समाधान, ऑनलाइन सेवाओं के सुधार और तय समय-सीमा के अनुपालन के जरिए भूमि प्रशासन को अधिक जवाबदेह और जनता के अनुकूल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। यह प्रयास राज्य में सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार को नई दिशा देने में सक्षम होगा।