Bihar Bhumi : बिहार में जमीन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए आने वाले दिनों में बड़ा झटका लग सकता है। राज्य सरकार जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े सर्किल रेट में बदलाव की तैयारी कर रही है। नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री मदन सहनी ने संकेत दिए हैं कि अब जमीन का सरकारी मूल्य यानी सर्किल रेट बढ़ाया जा सकता है। इससे जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री दोनों महंगी हो सकती हैं।
विभाग का कार्यभार संभालने के बाद मंत्री मदन सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास हुआ है। गांवों तक सड़क नेटवर्क पहुंच चुका है और सड़क किनारे की जमीनों की बाजार कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अब भी पुराने सर्किल रेट लागू हैं। ऐसे में बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच बड़ा अंतर हो गया है। सरकार अब इसी अंतर को कम करने की दिशा में काम करेगी ताकि राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सके।
मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार वर्ष 2013 में सर्किल रेट में बदलाव किया गया था, जबकि शहरी क्षेत्रों में 2016 में दरों को संशोधित किया गया था। उसके बाद से जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन सरकारी दरें लगभग स्थिर बनी रहीं। अब विभाग पूरे मामले की समीक्षा करेगा और जरूरत के अनुसार नई दरें तय की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि जमीन की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना भी है। कई जगहों पर बाजार मूल्य अधिक होने के बावजूद लोग कम सर्किल रेट पर रजिस्ट्री कराकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाते हैं। नए बदलाव के बाद ऐसी गड़बड़ियों पर भी रोक लग सकेगी।
मंत्री मदन सहनी ने विभागीय अधिकारियों को तकनीक के अधिक इस्तेमाल का निर्देश भी दिया है। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालयों में लोगों को पुराने दस्तावेज खोजने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। डिजिटाइजेशन पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े दस्तावेज कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।
विभाग के अनुसार, 1995 से 2026 तक के करीब 234 करोड़ दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। अब पुराने रिकॉर्ड को भी चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 1908 से 1995 तक के दस्तावेज अब भी अलग-अलग रजिस्ट्री कार्यालयों में सुरक्षित रखे गए हैं। इन्हें तीन चरणों में डिजिटल फॉर्मेट में बदला जा रहा है।
पहले चरण में 1990 से 1995 तक के रिकॉर्ड, दूसरे चरण में 1947 से 1989 तक के दस्तावेज और तीसरे चरण में 1908 से 1946 तक के पुराने कागजात को डिजिटल किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे और लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अगर सरकार सर्किल रेट में बढ़ोतरी का फैसला लेती है, तो आने वाले समय में बिहार में जमीन खरीदना पहले से अधिक महंगा हो सकता है। खासकर सड़क किनारे और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री पर लोगों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।