Bihar Liquor News : पटना के बाढ़ अनुमंडल के बेढ़ना गांव में एक साथ चार युवकों की संदिग्ध मौत के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। कथित तौर पर शराब पीने के बाद युवकों की तबीयत बिगड़ने और इलाज के दौरान मौत की बात सामने आ रही है। हालांकि, मौत की वजह जहरीली शराब ही है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।

घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन को जाम कर दिया। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और शराबबंदी के बावजूद कथित तौर पर शराब की उपलब्धता को लेकर प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीण मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और कथित शराब कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मंत्री विजय सिन्हा पहुंचे तो छलक पड़ा पिता का दर्द

घटना की जानकारी मिलने के बाद बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा सैदपुर टोला पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

इसी दौरान एक मृतक के पिता ने मंत्री के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बिहार की स्थिति और शराबबंदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज उनका बेटा चला गया, कल किसी और का बेटा मर जाएगा और लोग इसी तरह मरते रहेंगे।मृतक के पिता ने मंत्री से कहा, “ई कौन बिहार बना दिए हैं दादा, कैसा बना दिए हैं?” इस पर विजय सिन्हा ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा कि “सुधरेगा बिहार।”

लेकिन पिता का गुस्सा और दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा था। उन्होंने कहा कि सूखा नशा और शराब का असर इलाके में फैल गया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पढ़ने वाला था और सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर अपनी जीविका चलाने के लिए प्राइवेट नौकरी करता था। मंत्री के सामने हाथ जोड़कर उन्होंने कहा कि बेटा जब तक वापस नहीं मिलेगा, तब तक उनका परिवार किस तरह जी पाएगा। उनका दर्दनाक सवाल था कि जब बेटा ही नहीं रहा तो जीने का क्या मतलब है।

शराब पार्टी के बाद बिगड़ी तबीयत?

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव के एक घर में कथित तौर पर शराब पार्टी चल रही थी। इसी दौरान शराब पीने के बाद कुछ युवकों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। बताया जा रहा है कि उनके मुंह से झाग आने लगा।

इसके बाद सभी को इलाज के लिए बाढ़ अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान चार युवकों की मौत हो गई। घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतकों के घरों में कोहराम मचा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि युवकों ने वास्तव में जहरीली शराब का सेवन किया था या किसी अन्य जहरीले पदार्थ के कारण उनकी मौत हुई। इसलिए फिलहाल जहरीली शराब को मौत का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले निश्चित नहीं माना जा सकता।

शराबबंदी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

चार मौतों के बाद ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। लोगों ने सवाल उठाया कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब गांवों तक कैसे पहुंच रही है? ग्रामीणों का आरोप है कि शराब की कथित होम डिलीवरी तक हो रही है और पुलिस इसे रोकने में नाकाम है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब के साथ-साथ इलाके में सूखा नशा भी कथित तौर पर आसानी से उपलब्ध हो रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई होती तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।

फोरलेन जाम, सड़क पर उतरे ग्रामीण

चार युवकों की मौत से आक्रोशित लोगों ने बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन को जाम कर दिया। जाम के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और काफी देर तक यातायात बाधित रहा। ग्रामीणों की मांग है कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और कथित तौर पर शराब उपलब्ध कराने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवकों ने आखिर क्या सेवन किया था और उसकी वजह से उनकी तबीयत क्यों बिगड़ी।पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चारों मौतों की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जहरीली शराब की आशंका को लेकर इलाके में चर्चा तेज है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी के अमल को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ कानून के तहत शराब की बिक्री और सेवन पर रोक है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों के आरोप हैं कि अवैध शराब कथित तौर पर अब भी कई इलाकों में पहुंच रही है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है।