Bank Account Unfreeze Process: बिहार में साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन के कारण बैंक खाते फ्रीज होने या खाते में जमा रकम पर लियन (होल्ड) लगने से परेशान लोगों को अब बड़ी राहत मिलने वाली है. ऐसे मामलों में खाताधारकों को गुजरात, दिल्ली, मुंबई या दूसरे राज्यों के साइबर थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. अब वे अपने बैंक की होम ब्रांच में आवेदन देकर ही शिकायत दर्ज करा सकेंगे. इसके लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (14सी) ने ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम) पोर्टल विकसित किया है.
इस व्यवस्था के तहत बैंक संबंधित खाताधारक की शिकायत जीआरएम पोर्टल पर दर्ज कर उसे उस राज्य की पुलिस तक ऑनलाइन पहुंचाएंगे, जहां से खाते को फ्रीज किया गया है. इसके बाद संबंधित साइबर पुलिस शिकायत और लेन-देन की जांच करेगी. जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए खाताधारक का पक्ष भी सुन सकेंगे. जांच में खाताधारक की संलिप्तता नहीं मिलने पर खाता अनफ्रीज करने का निर्देश जारी किया जा सकेगा.
QR कोड से भुगतान लेने वाले कारोबारी भी हो रहे थे परेशान
यूपीआई और क्यूआर कोड से भुगतान का चलन बढ़ने के साथ ही कई छोटे कारोबारी भी इस समस्या से जूझ रहे थे. दुकानदार या कारोबारी सामान्य रूप से ग्राहकों से डिजिटल भुगतान लेते हैं, लेकिन अगर खाते में पहुंची रकम का संबंध किसी साइबर ठगी से निकलता है तो संबंधित पुलिस पूरे बैंक खाते को फ्रीज करवा देती है.
पटना के सोना कारोबारी दीपक कुमार और ब्यूटी पार्लर संचालिका ललिता देवी के साथ भी ऐसा ही हुआ. दोनों ने अपने ग्राहकों से क्यूआर कोड के जरिए सामान्य भुगतान लिया था. करीब 10 दिन बाद उन्हें पता चला कि गुजरात और दिल्ली की साइबर पुलिस ने उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं. बैंक पहुंचने पर उन्हें संबंधित राज्यों के साइबर थानों से संपर्क करने की सलाह दी गई. दूसरे राज्यों तक पहुंचना उनके लिए मुश्किल हो रहा था. अब जीआरएम पोर्टल के जरिए ऐसे मामलों में बैंक शाखा से ही शिकायत संबंधित पुलिस तक पहुंचाई जा सकेगी.
चार आसान स्टेप्स में दर्ज करा सकेंगे शिकायत
खाता फ्रीज होने या बैंक खाते पर लियन हटवाने के लिए खाताधारक को सबसे पहले अपनी होम ब्रांच में आवेदन देना होगा. इसके साथ केवाईसी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और संबंधित लेन-देन का पूरा ब्योरा जमा करना होगा.
दस्तावेजों की जांच के बाद बैंक कर्मचारी जीआरएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेंगे. इसके बाद खाताधारक को एक यूनिक ग्रीवांस आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए शिकायत की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा.
शिकायत दर्ज होने के बाद इसे संबंधित राज्य के साइबर थाने के जांच अधिकारी तक ऑनलाइन भेजा जाएगा. वहां अधिकारी पूरे मामले और लेन-देन की जांच करेंगे. जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खाताधारक से बातचीत कर उनका पक्ष भी सुना जाएगा.
शिकायत खारिज होने पर तीन स्तरों पर अपील का मौका
नई व्यवस्था में खाताधारकों को शिकायत के समाधान के लिए तीन स्तरों पर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है. अगर थाना स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होता है या आवेदन खारिज कर दिया जाता है तो खाताधारक जिला और राज्य स्तर पर अपनी शिकायत आगे बढ़ा सकेंगे.
इसके लिए थाना स्तर पर जांच अधिकारी और बैंक की ओर से ब्रांच ग्रीवांस ऑफिसर जिम्मेदार होंगे. जिला स्तर पर नामित पुलिस अधिकारी के साथ स्टेट ग्रीवांस ऑफिसर शिकायत देखेंगे. वहीं राज्य स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बैंक के नेशनल नोडल ऑफिसर तक अपील पहुंचाई जा सकेगी.
इस व्यवस्था से खासकर उन छोटे दुकानदारों, ज्वेलर्स, ब्यूटी पार्लर संचालकों और अन्य कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खाते में अनजाने में साइबर ठगी से जुड़ी रकम पहुंच जाती है. ऐसे मामलों में अब शिकायत दर्ज कराने के लिए दूसरे राज्यों की यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी. बैंक शाखा के माध्यम से ही संबंधित राज्य की पुलिस तक आवेदन पहुंचाया जा सकेगा.