बिहार में शहरों और इलाकों के नाम बदलने को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बख्तियारपुर का नाम बदलने के सवाल पर ऐसा बयान दिया है, जिसने इस मुद्दे को नई हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है कि बख्तियारपुर का नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया चल रही है या नहीं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बख्तियारपुर का नाम जरूर बदला जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में बिहार के नक्शे पर बख्तियारपुर किसी नए नाम के साथ दिखाई देगा? हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी नए नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि बख्तियारपुर के नाम को लेकर सरकार के भीतर विचार की गुंजाइश बनी हुई है।
‘बख्तियारपुर का नाम जरूर बदलना चाहिए’
रेनिमिंग सिटी को लेकर जब एक मीडिया इंटरव्यू में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय लिया गया है या नहीं। लेकिन उन्होंने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि बख्तियारपुर का नाम जरूर बदलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अगर बख्तियार खिलजी ने अराजकता फैलाई और इतिहास में नालंदा के जलाए जाने की घटनाओं का उल्लेख मिलता है, तो उसके नाम पर किसी शहर का नाम होना उचित नहीं माना जा सकता।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के अलग-अलग शहरों में प्रस्तावित नए टाउनशिप के नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार इन टाउनशिप के नाम बिहार के इतिहास, संस्कृति और पहचान से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक पटना में बन रहे नए टाउनशिप का नाम पाटलिपुत्र रखा गया है, क्योंकि पटना का ऐतिहासिक नाम पाटलिपुत्र रहा है। इसी तरह गया में बनने वाले नए टाउनशिप का नाम मगध रखा गया है। मुंगेर में बनने वाले टाउनशिप को अंग नाम दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने इसका संबंध अंग देश और राजा कर्ण की राजधानी से जोड़ा। वहीं भागलपुर को विक्रमशिला की ऐतिहासिक पहचान से जोड़ते हुए वहां विक्रमशिला टाउनशिप विकसित करने की बात कही।इसी क्रम में सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और सारण के छपरा इलाके में सारण नाम से टाउनशिप विकसित करने की बात मुख्यमंत्री ने कही। चंपारण की ऐतिहासिक भूमिका का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंपारण वह धरती है जहां महात्मा गांधी आए और सत्याग्रह किया। सरकार इस ऐतिहासिक पहचान को भी आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
बिहार की पहचान और संस्कृति पर जोर
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि बिहार की अस्मिता और संस्कृति को सामने लाना है। उन्होंने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु गोविंद सिंह, माता सीता और गया की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए बिहार की ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि बिहार वह धरती है जहां सिद्धार्थ आए और गौतम बुद्ध बनकर दुनिया को शांति का संदेश दिया। भगवान महावीर की भी इस धरती से गहरी जुड़ाव की बात उन्होंने कही। गुरु गोविंद सिंह की जन्मभूमि , माता सीता की जन्मभूमि और गया की पिंडदान परंपरा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल अपनी संस्कृति को जोड़ने का काम कर रही है।
गौरतलब हो कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्म एक मार्च 1951 को पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था। कई बार यह खुद कह चुके हैं कि मेरा यहां बचपन बीता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक किस्सा बताते हुए यह भी कहा था कि अब वह पहली बार गांधी मैदान में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद शाम करीब 4:30 बजे अपने मुख्यमंत्री कक्ष पहुंचे और नई और बड़ी जिम्मेदारी का भार कंधों पर आते ही उन्होंने सबसे पहले अपने पैतृक आवास यानी बख्तियारपुर वाले घर पर ही पर फोन किया थाही है।जैसे ही उधर से रिसीवर उठा, सीएम की आवाज आई- 'मां जी, मुख्यमंत्री कक्ष से मुन्ना बोल ही, आशीर्वाद देहो... कुर्सी पर बैठे से जिम्मेवारी बढ़ गेलई ह.' उन्होंने अपनी मां से वादा किया कि फुर्सत मिलते ही वह सीधे उनका चरण स्पर्श करने गांव आएंगे और तब से लेकर अभी तक नीतीश कुमार बख्तियारपुर जाते रहे हैं। इस बीच अब बख्तियारपुर का नाम बदलने का एलान बिहार के वर्तमान सीएम सम्राट ने किया है ।