Bihar Assembly :  बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही राजनीतिक गर्माहट के बीच शुरू हुई। दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े जनहित के मुद्दों को सदन में उठाया। विभिन्न विभागों से संबंधित सवालों पर सरकार से जवाब मांगा गया और कई अहम विषयों पर चर्चा हुई।


हालांकि, प्रश्नकाल शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर और सदन के बाहर विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायकों ने पंचायत टैक्स के मुद्दे, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और हाल ही में लाए गए कुछ नए कानूनों में संशोधन की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण कुछ देर तक सदन का माहौल गरमाया रहा, लेकिन बाद में कार्यवाही सामान्य रूप से शुरू हुई।


विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाले फैसले ले रही है और कई कानूनों में पर्याप्त चर्चा के बिना बदलाव किए जा रहे हैं। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए लगातार आवश्यक कदम उठा रही है।


मानसून सत्र के पहले दो दिनों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन के सामने रखा और उन्हें पारित भी कराया। सोमवार को सत्र के पहले दिन सरकार ने कुल सात विधेयक पेश किए थे। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष के लिए 87,383 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी विधानसभा में प्रस्तुत किया गया, जिस पर आगामी दिनों में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।


मंगलवार को विधानसभा ने छह महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी। इनमें बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, बिहार माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, बिहार नर्सेज पंजीकरण संशोधन विधेयक, बिहार चीनी उपक्रम अर्जन संशोधन विधेयक तथा बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष ने दावा किया कि इनसे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी।


तीसरे दिन भी सरकार का विधायी एजेंडा काफी व्यस्त रहने वाला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार आज विधानसभा में करीब 13 विधेयक पारित कराने की तैयारी में है। इनमें उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक और पंचायती राज विभाग का एक अहम विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा अन्य विभागों से संबंधित विधेयकों पर भी सदन की मंजूरी लेने का प्रयास किया जाएगा।


सरकार का कहना है कि इन विधेयकों का उद्देश्य राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय निकायों के कामकाज में सुधार लाना है। वहीं विपक्ष इन प्रस्तावित कानूनों पर विस्तृत चर्चा और सुझावों को शामिल करने की मांग कर रहा है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र के शेष दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। अनुपूरक बजट, नए विधेयकों और विभिन्न जनहित के विषयों को लेकर सदन में लगातार चर्चा होने की संभावना है।


फिलहाल तीसरे दिन की कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। एक ओर सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है, तो दूसरी ओर विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है। ऐसे में विधानसभा का यह सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।