पटना: बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का यह पहला मानसून सत्र है। पांच दिनों तक चलने वाला यह सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। सत्र के पहले दिन से ही सदन के अंदर और बाहर सियासी गर्मी देखने को मिली। विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की है।
सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा किया। विपक्ष के विधायक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से शांत रहने की अपील की और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने का आग्रह किया।
इससे पहले विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में पैदल मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधायकों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं, जिन पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारे लिखे हुए थे। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। विधानसभा परिसर में विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी आवाज बुलंद की।
अनुपूरक बजट पेश करेंगे वित्त मंत्री
मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य किए जाने हैं। वित्त मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश करेंगे। इस अनुपूरक बजट में सरकार विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान कर सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और आगामी नीतियों को लेकर भी सदन में बहस होने की संभावना है। कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन में पेश किए जा सकते हैं।
विपक्ष ने तैयार की सरकार को घेरने की रणनीति
मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद इसके काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। इनमें भरत तिवारी एनकाउंटर मामला, राबड़ी आवास खाली कराने का मुद्दा, कानून व्यवस्था और सरकार की नीतियां प्रमुख हैं। विपक्ष का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सदन में उठाएगा और सरकार से जवाब मांगेगा। वहीं, सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी कर ली है।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
एनडीए सरकार के लिए यह मानसून सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार जहां अपने विकास कार्यों और योजनाओं को सामने रखने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाने की तैयारी में है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पांच दिनों के इस छोटे सत्र में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। पहले दिन की शुरुआत से ही जिस तरह विपक्ष ने प्रदर्शन किया है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही हंगामेदार रह सकती है।