Bihar News : बिहार सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब लाभार्थियों को पहले की तरह चावल, दाल और अन्य सूखा राशन अलग-अलग नहीं दिया जाएगा। इसके स्थान पर पोषण से भरपूर रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट प्रीमिक्स खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। यह व्यवस्था राज्य के सभी 38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है।


इस बदलाव का उद्देश्य बच्चों और महिलाओं को संतुलित, सुरक्षित तथा गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराना है, ताकि कुपोषण की समस्या को कम किया जा सके और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।


किन लोगों को मिलेगा लाभ?

नई टेक होम राशन व्यवस्था का लाभ मुख्य रूप से इन वर्गों को मिलेगा—

- 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चे

- गर्भवती महिलाएं

- धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताएं

- गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे

सरकार का मानना है कि इन वर्गों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन मिलने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में तेजी आएगी, वहीं गर्भवती और धात्री महिलाओं को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकेंगे।


अब कौन-कौन से पोषण उत्पाद मिलेंगे?

नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को कई प्रकार के फोर्टिफाइड और प्रोटीन युक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से—

- न्यूट्री राइस खिचड़ी प्रीमिक्स

- न्यूट्री पुलाव

- फोर्टिफाइड मूंग दाल-चावल खिचड़ी

- मल्टीमिक्स अनाज एवं प्रोटीन प्रीमिक्स

- फोर्टिफाइड नमकीन दलिया

इन उत्पादों को इस तरह तैयार किया गया है कि इनमें आवश्यक विटामिन, खनिज और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहें। इन्हें आसानी से पकाया या सीधे उपयोग किया जा सकेगा।


वितरण की जिम्मेदारी कॉन्फेड को

समाज कल्याण विभाग ने टेक होम राशन की आपूर्ति की जिम्मेदारी बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉन्फेड) को सौंपी है। पंजीकृत लाभार्थियों की संख्या के आधार पर निर्धारित मात्रा में पोषण सामग्री संबंधित आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी, जहां से लाभार्थियों को इसका वितरण होगा।


पारदर्शिता बढ़ाने पर रहेगा जोर

पिछले कई वर्षों से टेक होम राशन वितरण को लेकर अनियमितताओं और शिकायतों की खबरें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित मेन्यू के अनुसार पूरी सामग्री नहीं मिलती थी। कई मामलों में केवल चावल, दाल और सोयाबीन देकर बाकी सामग्री का वितरण नहीं किया जाता था।


नई प्रीमिक्स आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और लाभार्थियों तक वही पोषण सामग्री पहुंचेगी, जो सरकार द्वारा निर्धारित की गई है। इससे खाद्यान्न की हेराफेरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों में भी कमी आने की संभावना है।


कुपोषण से लड़ाई होगी मजबूत

बिहार सरकार लंबे समय से बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाभार्थियों को नियमित रूप से फोर्टिफाइड और संतुलित आहार मिलता है तो एनीमिया, कम वजन और अन्य पोषण संबंधी समस्याओं में कमी लाई जा सकती है।


नई व्यवस्था से यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समान गुणवत्ता वाला पौष्टिक आहार पहुंचे। इससे आंगनवाड़ी सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ने के साथ-साथ राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


सरकार की इस नई पहल को पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी जिलों में नई व्यवस्था का क्रियान्वयन कितनी पारदर्शिता और नियमितता के साथ किया जाता है।