Bihar News : बिहार में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे अमीनों पर राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अल्टीमेटम की समय सीमा समाप्त होने के बाद हड़ताली अमीनों को उनके कामकाज और जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही उनकी ई-मापी पोर्टल आईडी भी निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस फैसले से हड़ताल कर रहे अमीनों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, विभाग ने जमीन की मापी का काम प्रभावित नहीं होने देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार कर ली है।
दरअसल, बिहार में राजस्व कर्मचारी और अमीन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 6 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का असर राज्य के अलग-अलग जिलों के अंचल कार्यालयों में देखने को मिल रहा है। जमीन की मापी से लेकर दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार और अन्य राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। लोगों को अपने जमीन संबंधी काम के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसी बीच सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सोमवार को स्पष्ट कर दिया गया था कि निर्धारित समय के भीतर काम पर योगदान नहीं देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पाण्डेय ने चेतावनी दी थी कि हड़ताल जारी रखने वाले कर्मचारियों को निलंबित किया जा सकता है। इसके अलावा हड़ताल की अवधि का वेतन भी नहीं दिया जाएगा। इस अवधि को ब्रेक इन सर्विस यानी सेवा में व्यवधान माना जा सकता है। इसके बावजूद जब अमीनों के काम पर लौटने की सूचना नहीं मिली तो विभाग ने कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया।
इस संबंध में विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पाण्डेय ने मंगलवार को राज्य के सभी जिलों के समाहर्ताओं को पत्र भेजा है। इसमें हड़ताल में शामिल अमीनों को उनके सभी कार्यों और दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही ई-मापी पोर्टल पर उनकी लॉगिन आईडी निष्क्रिय करने को कहा गया है। विभाग ने जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी है।
हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमीनों के हटने से जमीन की मापी का काम पूरी तरह प्रभावित न हो। इसके लिए विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की है। आदेश के मुताबिक, संबंधित अंचलों में विशेष सर्वेक्षण शिविरों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों को आनुपातिक आधार पर प्रतिनियुक्त किया जाएगा। यानी जिस अंचल में जितने अमीनों की जरूरत होगी, वहां उपलब्धता के अनुसार विशेष सर्वेक्षण अमीनों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए उनकी ई-मापी पोर्टल आईडी को सक्रिय कराने की व्यवस्था भी की जाएगी।
विभाग का कहना है कि अमीनों की मांगों को लेकर पहले भी बातचीत की गई थी। पिछले महीने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में राजस्व कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों और अमीनों के साथ दो दौर की वार्ता हुई थी। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक विचार करने और नियमानुसार जरूरी कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। विभाग के अनुसार, बातचीत में हुई प्रगति से कर्मचारियों को अवगत भी कराया गया था। इसके बावजूद हड़ताल समाप्त नहीं हुई।
अमीनों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। जमीन की खरीद-बिक्री के बाद दाखिल-खारिज, जमीन की मापी, जमाबंदी में सुधार और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को परेशानी हो रही है। कई मामलों में लोगों को अपने आवेदन के निपटारे का इंतजार करना पड़ रहा है। विभाग का कहना है कि सरकारी कामकाज के साथ-साथ आम जनता से जुड़ी जरूरी सेवाओं को लंबे समय तक बाधित नहीं रहने दिया जा सकता।
अब सरकार की कार्रवाई के बाद सबकी नजर अमीन संघ के अगले कदम पर है। सवाल यह है कि क्या कर्मचारी सरकार के आदेश के बाद हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटेंगे या अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे? फिलहाल विभाग ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति में भी जमीन मापी और राजस्व से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी