Bihar News :  राज्य में ट्रैफिक जाम की वजह से एंबुलेंस के फंसने और मरीजों की मौत के बढ़ते मामलों को लेकर बिहार प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी हाल में एंबुलेंस को जाम में नहीं रुकना चाहिए। यदि किसी सड़क, चौराहे या बाजार क्षेत्र में एंबुलेंस फंसी मिलती है, तो वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि मरीज की जिंदगी बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


दरअसल, हाल के दिनों में राज्य के कई जिलों में हुई ‘रोगी कल्याण समिति’ की बैठकों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। अधिकारियों के सामने यह बात सामने आई कि शहरों और अस्पतालों के आसपास लगने वाले जाम की वजह से गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जाम के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचने में औसतन 20 से 25 मिनट की देरी हो रही है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो रही है।


भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) की रिपोर्ट ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, पिछले छह महीनों में ऐसे 15 से 20 मामले सामने आए, जिनमें मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके थे। इनमें कई मरीज ऐसे थे जो एंबुलेंस में जाम में फंस गए थे और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। मायागंज अस्पताल में भागलपुर के अलावा बांका, कटिहार, पूर्णिया और मुंगेर जैसे जिलों से भी गंभीर मरीज इलाज के लिए लाए जाते हैं।


इसी स्थिति को देखते हुए अब राज्य के बड़े अस्पतालों के मुख्य गेट के आसपास विशेष व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार ने अस्पताल के प्रवेश द्वार से 100 मीटर के दायरे को ‘जीरो टॉलरेंस जोन’ घोषित करने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र में ऑटो, ई-रिक्शा या अन्य वाहनों की अवैध पार्किंग और भीड़ पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। अक्सर देखा जाता है कि अस्पतालों के बाहर ऑटो चालकों और छोटे वाहनों की भीड़ के कारण एंबुलेंस को अंदर जाने में काफी परेशानी होती है। अब इस अव्यवस्था को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी रखी जाएगी।


साथ ही, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से एंबुलेंस की आवाजाही पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। जहां भी एंबुलेंस को बाधा पहुंचेगी, वहां तुरंत ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि तकनीक की मदद से मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।


भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि मरीज की जान बचाना सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी जिलों में एंबुलेंस को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया गया है कि सायरन सुनते ही तत्काल रास्ता खाली कराया जाए। अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। सरकार के इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि अब गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं होगी और कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।