पटना: बिहार के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी ITI को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। राज्य के सभी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अब सोलर पैनल लगाने की तैयारी है। इसके प्रस्ताव पर सहमति दे दी गई है। सरकार का उद्देश्य ITI में बिजली पर निर्भरता और ऊर्जा खर्च को कम करना है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से संस्थानों में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में संचालन पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।
यह निर्णय मंगलवार को युवा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री अरुण शंकर प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में ITI से जुड़े बुनियादी ढांचे, कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और छात्र सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
सभी सरकारी ITI में लगेंगे सोलर पैनल
राज्य सरकार की योजना के तहत सभी राजकीय ITI में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे संस्थानों में बिजली की खपत कम करने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। ITI जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थानों में बिजली की जरूरत अपेक्षाकृत अधिक होती है। ऐसे में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल संस्थानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
सरकार का मानना है कि सोलर पैनल लगने से बिजली के बिल में कमी आएगी और भविष्य में ITI के संचालन खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही विद्यार्थियों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।
जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी
बैठक में जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी है। सरकार की ओर से कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करने के लिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से कौशल शिक्षा को अधिक व्यवस्थित और रोजगारपरक बनाने की दिशा में काम किया जा सकेगा। ITI और अन्य कौशल प्रशिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों के लिए भी इसका व्यापक महत्व माना जा रहा है।
नोडल ITI में NAPS लागू करने पर जोर
बैठक में नेशनल एप्रेंटिशिप प्रमोशन स्कीम यानी NAPS को सभी नोडल ITI में तेजी से लागू कराने पर भी जोर दिया गया। अप्रेंटिशिप के जरिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के साथ उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है। सरकार का फोकस अब ITI में केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार करने पर भी है। NAPS के बेहतर क्रियान्वयन से प्रशिक्षित युवाओं को कंपनियों और विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में काम का अनुभव हासिल करने में मदद मिल सकती है।
पूर्व छात्रों के लिए बनेगी एल्युमिनाइ एसोसिएशन
राज्य के ITI के पुराने छात्रों को भी संस्थानों से जोड़ने का फैसला लिया गया है। इसके लिए एल्युमिनाइ एसोसिएशन गठित की जाएगी। इसका उद्देश्य ITI के पूर्व छात्रों को संस्थानों के साथ जोड़े रखना और उनके अनुभव का लाभ वर्तमान विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। पूर्व छात्र अपने कार्यक्षेत्र का अनुभव साझा करने के साथ विद्यार्थियों को करियर, रोजगार और उद्योग से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी दे सकते हैं। इससे ITI और उसके पूर्व छात्रों के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है।
महिला ITI में PPP मॉडल पर बनेंगे छात्रावास
जिन जिलों के महिला ITI में फिलहाल छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां छात्राओं के लिए बड़ी पहल की गई है। बैठक में ऐसे संस्थानों में PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर छात्रावास निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। छात्रावास की सुविधा मिलने से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को ITI में प्रशिक्षण लेने में सहूलियत होगी। इससे तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
बिना भवन वाले ITI के लिए जमीन दान की अपील
बैठक में उन सरकारी ITI के लिए भी अहम फैसला लिया गया, जिनके पास फिलहाल अपना भवन नहीं है। ऐसे संस्थानों के लिए आम लोगों से भूमि दान लेने के उद्देश्य से विज्ञापन जारी करने पर सहमति बनी है। सरकार की ओर से भूमि दान करने वाले व्यक्ति या उनके पूर्वजों के नाम पर संबंधित ITI का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे स्थानीय लोगों को तकनीकी शिक्षा के लिए संस्थान विकसित करने में भागीदारी का अवसर मिलेगा और जमीन की समस्या वाले ITI को अपना स्थायी भवन उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकेगी।
बैठक में कौशल विकास विभाग के सचिव कौशल किशोर और निदेशक रंजीत कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सरकार के इन फैसलों से राज्य के ITI में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, ऊर्जा बचत, छात्रावास निर्माण और कौशल प्रशिक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साथ ही उद्योगों से जुड़ाव और अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाकर युवाओं को रोजगार के लिए अधिक तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।