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11-Jan-2026 03:08 PM
By First Bihar
PATNA: बिहार में एग्रीस्टैक महाअभियान के तहत चल रहे फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति में जिलों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया है। रिविजनल सर्वे (RS) वाले जिले बेहतर भूमि अभिलेखों के कारण आगे हैं, जबकि कैडस्ट्रल सर्वे (CS) जिलों में दशकों पुराने रिकॉर्ड, उत्तराधिकार विवाद और संयुक्त जोत जैसी समस्याएँ रजिस्ट्रेशन की रफ्तार में बाधा बन रही हैं। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे संरचनात्मक चुनौती बताते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति का विश्लेषण यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव रजिस्ट्रेशन की गति और कन्वर्जन पर पड़ता है। रिविजनल सर्वे (RS) वाले जिलों में अपेक्षाकृत साफ और अद्यतन अभिलेख होने के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों में उत्तराधिकार, संयुक्त जोत और पुराने अभिलेखों से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियाँ हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार विशेष रणनीति के साथ कार्य कर रही है। सीएस जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन के साथ परिमार्जन एवं दाखिल–खारिज की आसान सुविधा तथा मौजूदा e-KYC के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह किसी प्रकार की प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत से जुड़ी स्वाभाविक चुनौती है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर किसान को यूनिक किसान आईडी से जोड़कर केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करना है।आरएस और सीएस दोनों प्रकार के जिलों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य निर्धारण किया जा रहा है, ताकि राज्य स्तर पर एग्रीस्टैक महाअभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके और राज्य के सभी किसान डिजिटल रूप से सशक्त बनें|
राज्य में एग्रीस्टैक के अंतर्गत चल रहे फार्मर्स रजिस्ट्रेशन महाअभियान की प्रगति की समीक्षा में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया है कि रिविज़नल सर्वे (RS) वाले जिले, कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।09 जनवरी 2026, रात्रि 08:00 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फार्मर्स रजिस्ट्रेशन के कन्वर्जन रेट, रजिस्ट्रेशन की गति तथा राज्य स्तरीय रैंकिंग में सुधार के मामले में आरएस जिलों की स्थिति अधिक सुदृढ़ पाई गई है। इसका मुख्य कारण इन जिलों में भूमि अभिलेखों की अपेक्षाकृत बेहतर गुणवत्ता, अद्यतन जमाबंदी एवं कम उत्तराधिकार विवाद है।
•आरएस जिलों में उल्लेखनीय उपलब्धि
फार्मर्स रजिस्ट्रेशन में 100 प्रतिशत या उससे अधिक उपलब्धि प्राप्त करने वाले जिलों में मुजफ्फरपुर, वैशाली, अररिया, भागलपुर एवं कटिहार जैसे जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सभी रिविज़नल सर्वे से आच्छादित हैं। इन जिलों में भूमि अभिलेखों की स्पष्टता के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में न्यूनतम बाधाएँ सामने आ रही हैं।
•सीएस जिलों में संरचनात्मक बाधाएँ
वहीं पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, पटना, लखीसराय एवं मुंगेर जैसे कैडस्ट्रल सर्वे प्रधान जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई है। इन जिलों में उत्तराधिकार के लंबित मामलों, संयुक्त जोत, भू-खण्डों के अत्यधिक विखंडन तथा पुराने एवं त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह स्पष्ट किया गया है कि यह स्थिति प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम नहीं, बल्कि पुरानी एवं संरचनात्मक अभिलेखीय चुनौतियों के कारण उत्पन्न हुई है।
•रैंकिंग प्रवृत्ति भी दर्शाती है अंतर
08 से 09 जनवरी के बीच जिलों की रैंकिंग में हुए परिवर्तन से भी यही प्रवृत्ति दिखती है। कैमूर, भोजपुर, भागलपुर एवं वैशाली जैसे आरएस जिलों में उल्लेखनीय रैंकिंग में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि नालंदा, पटना, जहानाबाद एवं जमुई जैसे सीएस जिलों में रैंकिंग में ठहराव अथवा गिरावट देखी जा रही है।
•नीति एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण
एग्रीस्टैक प्रणाली में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन के लिए साफ भू-खण्ड, स्पष्ट स्वामित्व एवं न्यूनतम मैनुअल हस्तक्षेप आवश्यक है। यह रिविजनल सर्वे वाले जिलों में अपेक्षाकृत सहज रूप से उपलब्ध हैं। इसी के दृष्टिगत विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है कि जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन लगाकर परिमार्जन और दाखिल–खारिज के साथ मौजूदा ई–केवाईसी के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जाएगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरएस जिलों के लिए आक्रामक लक्ष्य यथार्थपरक हैं, जो राज्य स्तर पर समग्र उपलब्धि सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगे। यह स्पष्ट है कि राज्य में एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन का प्रदर्शन कैडस्ट्रल सर्वे एवं रिविजनल सर्वे की संरचना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। जहाँ आरएस जिले क्रियान्वयन के लिए अधिक अनुकूल हैं, वहीं सीएस जिलों में दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत के कारण प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक समय ले रही है।यहां जोत में सुधार को राज्य सरकार चुनौती मानते हुए उसमें सुधार के उपाय में जुटी है।
•ये हैं आंकड़े
कुल पंजीकरण संख्या के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला 75,568 पंजीकरण के साथ राज्य में शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद वैशाली (60,697), कटिहार (58,611), पूर्णिया (56,030) और भागलपुर (55,314) जैसे आरएस जिले अग्रणी हैं। अररिया, गया और सीतामढ़ी ने भी 45 हजार से अधिक पंजीकरण कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वहीं आरएस पार्शियल श्रेणी में समस्तीपुर (35,767), सुपौल (33,185) और बांका (30,174) ने अच्छी प्रगति दर्ज की। CS जिलों में पूर्वी चंपारण (51,145), दरभंगा (44,834), बेगूसराय (41,932) और नालंदा (38,146) की संख्या तक पहुंचा है। कुछ सीएस जिलों जैसे अरवल, जहानाबाद और लखीसराय में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
एग्रीस्टैक महाअभियान के तहत किसान पंजीकरण में ऐतिहासिक प्रगति। 10 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है और अभियान तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यूनिक किसान आईडी से किसानों को योजनाओं का सीधा, पारदर्शी और समयबद्ध लाभ मिलेगा।
— Vijay Kumar Sinha (@VijayKrSinhaBih) January 11, 2026
लक्ष्य है - हर पात्र किसान को डिजिटल रूप से सशक्त… pic.twitter.com/QjnaqwgROb