Bihar News: बिहार में जनता की समस्याओं से जुड़ी फाइलों को लंबित रखने वाले अधिकारियों पर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ शब्दों में निर्देश दिया है कि जनता के काम हर हाल में तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री के इस सख्त संदेश के बाद पहली बड़ी कार्रवाई मुजफ्फरपुर जिले में देखने को मिली, जहां एक राजस्व अधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।


भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि मुजफ्फरपुर के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को कार्य में लगातार लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि काम में कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


दिलीप जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग पर सबसे अधिक भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और यह समस्या कैंसर की तरह विभाग को जकड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि अब “एंटीबायोटिक” से इसका इलाज शुरू कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि तीन महीने की हड़ताल के कारण कई काम प्रभावित हुए हैं, इसलिए अब अधिकारियों को दिन-रात मेहनत कर ईमानदारी से कार्य करना होगा।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 मई को ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी फाइल का निष्पादन 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं होने पर 31वें दिन संबंधित अधिकारी को स्वतः निलंबित माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 की शुरुआत करते हुए कहा था कि अब जनता को फाइलों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।


मुख्यमंत्री ने सोमवार को फिर दोहराया कि फाइलों को अटकाने और भटकाने की संस्कृति खत्म करनी होगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय से जुड़े मामलों में भी 30 दिनों के भीतर कोई न कोई कार्रवाई दिखनी चाहिए। यदि अंतिम आदेश संभव नहीं हो तो अंतरिम आदेश जरूर जारी होना चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को 10वें, 20वें और 25वें दिन नोटिस जारी की जाएगी। 25वें दिन की नोटिस के बाद संबंधित अधिकारी खुद को निलंबित समझें।