पटना/अररिया: बिहार में जमीन से जुड़े काम कराने वाले लोगों के लिए अंचल कार्यालयों की तस्वीर बदलने की तैयारी है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जमीन की मापी और रिकॉर्ड से जुड़े कामों में भ्रष्टाचार और बिचौलियों के हस्तक्षेप की शिकायतों के बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निगरानी का बड़ा प्लान तैयार किया है। राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों को हाईटेक सर्विलांस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
अब अंचल कार्यालय में कौन आ रहा है, कौन कितनी देर रुक रहा है, कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचे या नहीं और कार्यालय परिसर में किसी अनधिकृत व्यक्ति की गतिविधि तो नहीं है—इन तमाम चीजों पर मुख्यालय की नजर रखने की योजना है। खास बात यह है कि इसकी मॉनिटरिंग राजधानी पटना से की जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने गुरुवार को अररिया सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि विभाग भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है और नई निगरानी व्यवस्था से गड़बड़ी पर सीधे नजर रखी जा सकेगी।
पटना में बनेगा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
सरकार की योजना के मुताबिक पटना में आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यही केंद्र राज्यभर के अंचल कार्यालयों में लगाए जाने वाले CCTV कैमरों की निगरानी करेगा।इसका मतलब यह हुआ कि किसी अंचल कार्यालय में होने वाली गतिविधियों की जानकारी सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यालय से संबंधित कार्यालय की लाइव स्थिति देखी जा सकेगी। विभाग का मानना है कि केंद्रीय निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद शिकायतों की जांच में भी मदद मिलेगी। किसी घटना या विवाद के बाद पुराने CCTV फुटेज को देखकर पूरे मामले की स्थिति समझी जा सकेगी।
दाखिल-खारिज काउंटर से CO के कमरे तक कैमरे
सर्विलांस नेटवर्क के तहत अंचल कार्यालय के महत्वपूर्ण स्थानों को कैमरों की निगरानी में लाने की योजना है। इनमें दाखिल-खारिज काउंटर, अभिलेखागार, अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मियों के कार्य कक्ष शामिल हैं। इसके अलावा कार्यालय परिसर के प्रवेश और निकास द्वार पर भी कैमरे लगाए जाएंगे। यानी निगरानी सिर्फ कमरे के अंदर तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरे परिसर की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था होगी। CCTV फुटेज के लिए क्लाउड और लोकल स्टोरेज बैकअप रखने की योजना है। इससे किसी शिकायत के सामने आने पर संबंधित समय की पुरानी रिकॉर्डिंग निकालकर जांच की जा सकेगी।
बार-बार आने वालों पर भी होगी नजर
राजस्व विभाग में जमीन संबंधी काम के लिए आम लोगों को कई बार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी समस्या को देखते हुए नई व्यवस्था में यह भी देखा जाएगा कि कोई व्यक्ति बार-बार कार्यालय क्यों आ रहा है। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के अनुसार, सर्विलांस के जरिए यह समझने में मदद मिलेगी कि कहीं किसी काम को जानबूझकर लंबित तो नहीं रखा जा रहा या किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से बार-बार कार्यालय बुलाया तो नहीं जा रहा। दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन की मापी जैसे मामलों में बिचौलियों के जरिए अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने की बात भी मंत्री ने कही। नई व्यवस्था का एक उद्देश्य ऐसे अनधिकृत हस्तक्षेप पर लगाम लगाना भी है।
कर्मचारी कब आते हैं, जनता से कैसा व्यवहार करते हैं—सब पर नजर
CCTV निगरानी सिर्फ भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग के स्तर पर कर्मचारियों के समय पर कार्यालय पहुंचने और जनता के साथ व्यवहार को भी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई है। कार्यालय में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी को भी देखा जाएगा। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है तो मुख्यालय स्तर से मामले की जांच की जा सकती है। इससे अंचल कार्यालयों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
फाइल अटकाई तो कार्रवाई का संकेत
जमीन से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी शिकायतों में एक फाइलों के अनावश्यक रूप से लंबित रहने की भी होती है। विभाग अब ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने की बात कह रहा है। मंत्री ने कहा कि यदि किसी मामले में संदिग्ध गतिविधि सामने आती है या फाइलों को बिना कारण लंबित रखा जाता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यानी नई व्यवस्था का मकसद केवल कैमरे लगाना नहीं, बल्कि CCTV निगरानी के आधार पर जवाबदेही तय करना भी है।
तीन महीने में कई कर्मियों पर कार्रवाई
मंत्री डॉ. जायसवाल ने यह भी बताया कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पिछले तीन महीनों में अधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों, डाटा ऑपरेटरों और अन्य कर्मियों पर कार्रवाई की गई है। विभाग की नई रणनीति में तकनीक के इस्तेमाल को अहम माना जा रहा है। जमीन से जुड़े कामों को लेकर आम लोगों की शिकायतें लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रही हैं। ऐसे में 537 अंचल कार्यालयों को एक केंद्रीय निगरानी नेटवर्क से जोड़ने की योजना को इसी दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि CCTV कैमरों और पटना के कमांड सेंटर की निगरानी व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। अगर निगरानी के साथ शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित होती है, तो अंचल कार्यालयों में काम कराने वाले आम रैयतों के लिए व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो सकती है।