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05-Feb-2026 07:32 AM
By First Bihar
Bihar Hospitals Notice : बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (BSPCB) ने राज्य में बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पर्षद ने राज्य के करीब 400 अस्पतालों को नोटिस जारी करते हुए तय मानकों के अनुरूप मेडिकल कचरे का निस्तारण नहीं करने पर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई राज्य और जिला स्तर पर एक साथ शुरू की गई है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके।
पर्षद के अध्यक्ष डीके शुक्ला ने बताया कि पिछले दो से तीन दिनों में बड़ी संख्या में अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि कई अस्पताल बायोमेडिकल कचरे के निपटान के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, बायोमेडिकल कचरे में उपयोग किए गए सिरिंज, ब्लड बैग, पट्टियां, दवाइयों के अवशेष, लैब में उपयोग किए गए रसायन तथा अन्य संक्रमित सामग्री शामिल होती है। यदि इनका वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन नहीं किया जाए तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्षद ने सख्ती बरतनी शुरू की है।
पर्षद ने संबंधित जिलों के सिविल सर्जन को भी इस मामले की जानकारी भेज दी है, ताकि जिला स्तर पर अस्पतालों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे अस्पतालों की पहचान कर रिपोर्ट तैयार करें और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
पर्षद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में मेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए चार नोडल केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों से भी रिपोर्ट मांगी गई है कि किन अस्पतालों द्वारा बायोमेडिकल कचरा निस्तारण के लिए निर्धारित एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं किया जा रहा है। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर, पटना जिले में भी अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की जांच गुरुवार से शुरू होने जा रही है। इसके तहत जिले के प्रत्येक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र की बारीकी से जांच की जाएगी। जांच के दौरान अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का आकलन किया जाएगा। यदि कोई अस्पताल तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसका लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
बताया जा रहा है कि सिविल सर्जन के पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण पिछले तीन दिनों से कार्रवाई स्थगित थी। अब नए अधिकारी के योगदान देने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण पर्षद संयुक्त रूप से इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
पर्षद ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन सुनिश्चित करें। साथ ही अस्पतालों को प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति, कचरे के अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकरण तथा अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से निष्पादन करने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है, जिससे पूरे राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।