Bihar News : बिहार सरकार ने जिलों में विकास कार्यों की गति और उनकी प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जिलों के प्रभारी मंत्रियों की तैनाती के बाद अब राज्य सरकार ने प्रभारी सचिवों की नियुक्ति भी कर दी है। इसके तहत सभी जिलों में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा और उनके क्रियान्वयन पर नजर रखेंगे।


मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के कुल 34 अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना है।


अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों में चल रही विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति तथा प्रशासनिक गतिविधियों की नियमित निगरानी करेंगे। इसके साथ ही वे जिला स्तर पर होने वाली समस्याओं की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी देंगे।


राजधानी पटना के लिए आईएएस विनय कुमार को प्रभारी सचिव बनाया गया है, जबकि नालंदा जिले की जिम्मेदारी कुमार रवि को सौंपी गई है। कुमार रवि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में सचिव पद पर कार्यरत हैं। गया जिले के लिए राबर्ट एल चोंग्थू, भोजपुर के लिए संतोष कुमार मल्ल, सारण के लिए पंकज कुमार और मधुबनी के लिए नर्मदेश्वर लाल को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है।


दरभंगा में राजेश कुमार, मुंगेर में पंकज कुमार पाल, पश्चिम चंपारण में अभय कुमार सिंह, बक्सर में अजय कुमार यादव, कैमूर में दिवेश सेहरा और रोहतास में संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह सीवान में धर्मेंद्र सिंह, सहरसा में विनोद सिंह गुंजियाल, अररिया में मो. सोहैल, गोपालगंज में जय सिंह और औरंगाबाद में मनोज कुमार को प्रभारी सचिव बनाया गया है।


भागलपुर जिले के लिए दीपक आनंद को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं समस्तीपुर में प्रणव कुमार, पूर्णिया में कार्तिकेय धनजी, अरवल और जहानाबाद में आशिमा जैन, सुपौल में सीमा त्रिपाठी और मुजफ्फरपुर में चंद्रशेखर सिंह को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है।


इसके अलावा कटिहार में राज कुमार, किशनगंज में अनिमेष कुमार परासर, जमुई में कौशल किशोर, शिवहर-सीतामढ़ी में राजीव रौशन, शेखपुरा और लखीसराय में कंवल तुनज, वैशाली में रचना पाटिल, नवादा में हिमांशु शर्मा, पूर्वी चंपारण में शीर्षत कपिल अशोक, बांका में निलेश रामचंद्र देवरे तथा मधेपुरा एवं खगड़िया में राहुल कुमार को प्रभारी सचिव के रूप में तैनात किया गया है।


सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक ढांचे में सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे जिलों में विकास कार्यों की गति तेज होगी और योजनाओं की जमीनी हकीकत की नियमित समीक्षा संभव हो सकेगी।

री कार्यक्रमों की प्रगति तथा प्रशासनिक गतिविधियों की नियमित निगरानी करेंगे। इसके साथ ही वे जिला स्तर पर होने वाली समस्याओं की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी देंगे।


राजधानी पटना के लिए आईएएस विनय कुमार को प्रभारी सचिव बनाया गया है, जबकि नालंदा जिले की जिम्मेदारी कुमार रवि को सौंपी गई है। कुमार रवि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में सचिव पद पर कार्यरत हैं। गया जिले के लिए राबर्ट एल चोंग्थू, भोजपुर के लिए संतोष कुमार मल्ल, सारण के लिए पंकज कुमार और मधुबनी के लिए नर्मदेश्वर लाल को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है।


दरभंगा में राजेश कुमार, मुंगेर में पंकज कुमार पाल, पश्चिम चंपारण में अभय कुमार सिंह, बक्सर में अजय कुमार यादव, कैमूर में दिवेश सेहरा और रोहतास में संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह सीवान में धर्मेंद्र सिंह, सहरसा में विनोद सिंह गुंजियाल, अररिया में मो. सोहैल, गोपालगंज में जय सिंह और औरंगाबाद में मनोज कुमार को प्रभारी सचिव बनाया गया है।


भागलपुर जिले के लिए दीपक आनंद को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं समस्तीपुर में प्रणव कुमार, पूर्णिया में कार्तिकेय धनजी, अरवल और जहानाबाद में आशिमा जैन, सुपौल में सीमा त्रिपाठी और मुजफ्फरपुर में चंद्रशेखर सिंह को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है।


इसके अलावा कटिहार में राज कुमार, किशनगंज में अनिमेष कुमार परासर, जमुई में कौशल किशोर, शिवहर-सीतामढ़ी में राजीव रौशन, शेखपुरा और लखीसराय में कंवल तुनज, वैशाली में रचना पाटिल, नवादा में हिमांशु शर्मा, पूर्वी चंपारण में शीर्षत कपिल अशोक, बांका में निलेश रामचंद्र देवरे तथा मधेपुरा एवं खगड़िया में राहुल कुमार को प्रभारी सचिव के रूप में तैनात किया गया है।


सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक ढांचे में सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे जिलों में विकास कार्यों की गति तेज होगी और योजनाओं की जमीनी हकीकत की नियमित समीक्षा संभव हो सकेगी।