Bihar News: बिहार के हजारों भूमिहीन परिवारों के लिए इस स्वतंत्रता दिवस पर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार 15 अगस्त के मौके पर प्रदेश के करीब 30 हजार योग्य भूमिहीन परिवारों को वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र यानी जमीन का पर्चा देने की तैयारी में है। यह लाभ ‘अभियान बसेरा-2’ के तहत दिया जाएगा। पर्चा मिलने के बाद इन परिवारों को अपनी जमीन पर कानूनी अधिकार मिलेगा और उनके लिए पक्के मकान का सपना पूरा करने का रास्ता भी आसान होगा।

हालांकि, लक्ष्य को समय पर पूरा करने को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलों को सख्त निर्देश दिए हैं। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई जिले अभी तक अपने निर्धारित लक्ष्य का 35 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं कर पाए हैं। इसके बाद विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को अभियान में तेजी लाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

15 अगस्त को मिलेगा जमीन का अधिकार

राज्य सरकार की योजना के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योग्य लाभुकों के बीच वासभूमि का पर्चा वितरित किया जाएगा। इसका सीधा फायदा उन गरीब परिवारों को मिलेगा, जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। डीएम और अपर समाहर्ता को अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

क्या है ‘अभियान बसेरा-2’?

अभियान बसेरा-2 बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ऐसे गरीब और भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है।इस योजना के तहत प्रशासन पहले भूमिहीन परिवारों की पहचान करता है। इसके बाद सरकारी जमीन में से उपयुक्त भूमि चिह्नित कर पात्र परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।यानी जिन परिवारों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उनके लिए यह अभियान सिर्फ जमीन का पर्चा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपना घर बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

कैसे मिलेगा जमीन का पर्चा? समझें पूरी प्रक्रिया

भूमिहीन परिवारों को पर्चा देने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाती है।

पहला चरण—लाभुकों की पहचान:
अंचल स्तर पर अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी गांवों एवं टोलों में भूमिहीन परिवारों की जानकारी जुटाते हैं। सर्वे के आधार पर पात्र परिवारों की सूची तैयार की जाती है।

दूसरा चरण—सरकारी जमीन की पहचान:
पात्र परिवारों के लिए सरकारी जमीन की तलाश की जाती है। इसमें गैरमजरुआ आम, गैरमजरुआ खास या अन्य उपलब्ध सरकारी भूमि को देखा जाता है। जहां संभव होता है, वहां सिलिंग से प्राप्त भूमि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

तीसरा चरण—सत्यापन:
लाभुकों की पात्रता और जमीन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाती है। इसके बाद संबंधित अंचल कार्यालय में बंदोबस्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

चौथा चरण—पर्चा तैयार होना:
सभी आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभुक के नाम वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र तैयार किया जाता है।

पांचवां चरण—पर्चे का वितरण:
जिला और प्रखंड स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में पात्र परिवारों को आधिकारिक रूप से जमीन का पर्चा सौंपा जाता है। इस बार 15 अगस्त को बड़े स्तर पर पर्चा वितरण की तैयारी है।

सरकार ने जिलों को क्यों दिया सख्त निर्देश?

अभियान के लक्ष्य को समय पर पूरा करने में कई जिलों की धीमी प्रगति सामने आई है। समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश जिले अभी निर्धारित लक्ष्य के 35 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में 15 अगस्त तक 30 हजार लाभुकों को पर्चा देने का लक्ष्य पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

इसी को देखते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलाधिकारियों और अपर समाहर्ताओं को अभियान की रोजाना समीक्षा करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे लंबित मामलों को तेजी से निपटाएं और पात्र लाभुकों को समय पर जमीन का अधिकार दिलाएं।

पर्चा मिलने के बाद क्या होगा फायदा?

भूमिहीन परिवारों के लिए जमीन का पर्चा मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें आवासीय भूमि पर कानूनी अधिकार मिलता है। इसके अलावा पात्रता पूरी होने पर वे सरकार की विभिन्न आवासीय योजनाओं का लाभ लेने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यानी इस पहल से एक तरफ गरीब परिवारों को जमीन का अधिकार मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ अपना पक्का घर बनाने का सपना भी मजबूत होगा।

30 हजार परिवारों के लिए उम्मीद की नई जमीन

15 अगस्त को अगर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 30 हजार परिवारों को वासभूमि का पर्चा मिलता है, तो यह बिहार के भूमिहीन गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी। सरकार और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तय समय सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करने की है।

राजस्व विभाग ने साफ कर दिया है कि अभियान में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में जिलों की प्रगति पर नजर रहेगी और यह देखना अहम होगा कि 15 अगस्त तक कितने भूमिहीन परिवारों को अपने आशियाने के लिए जमीन का कानूनी अधिकार मिल पाता है।