पटना: बिहार में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में अनियमितता को लेकर सरकार का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। लघु जल संसाधन विभाग से जुड़े तीन इंजीनियरों के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामले में कार्रवाई की गई है। एक अधीक्षण अभियंता को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में निलंबित किया गया है, जबकि दो अन्य इंजीनियरों के खिलाफ सरकारी काम की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितता को लेकर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। तीनों मामलों में जांच की जिम्मेदारी मुख्य जांच आयुक्त, बिहार को दी गई है।


सबसे बड़ी कार्रवाई छपरा में तैनात अधीक्षण अभियंता राजेन्द्र कुमार के खिलाफ हुई है। विशेष निगरानी इकाई की जांच में उन पर अपनी वैध आय से करीब 3.02 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा है। इसी मामले में उनके खिलाफ 10 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी अगले ही दिन यानी 11 सितंबर को लघु जल संसाधन विभाग को दी गई। इसके बाद विभाग ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए राजेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया।


विशेष निगरानी इकाई के अनुसार, शुरुआती जांच में राजेन्द्र कुमार के पास उनकी ज्ञात और वैध आय की तुलना में करीब 3,01,87,108 रुपये अधिक की संपत्ति होने के साक्ष्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने इस रकम को उनकी वैध आय से लगभग 102.03 प्रतिशत अधिक बताया है। यानी जांच में सामने आया कि उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा घोषित और वैध आय के मुकाबले काफी अधिक है। इसी आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है।


राजेन्द्र कुमार उस समय लघु सिंचाई अंचल, छपरा में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उनके पास लघु जल संसाधन विभाग, पटना में अधीक्षण अभियंता मुख्यालय और अनुश्रवण का अतिरिक्त प्रभार भी था। निलंबन के बाद उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के कार्यालय में निर्धारित किया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।


वहीं, भ्रष्टाचार से जुड़ी दूसरी कार्रवाई किसी संपत्ति के मामले में नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया को लेकर हुई है। भागलपुर के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार सिंह और बांका के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विजय कुमार वर्मा के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। दोनों पर हेथ चन्दन बांध के जीर्णोद्धार कार्य की निविदा के निष्पादन में कथित अनियमितता का आरोप है।


संजीव कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई उस अवधि से जुड़ी है, जब वे भागलपुर में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात थे। वहीं विजय कुमार वर्मा के खिलाफ आरोप उस समय का है, जब वे बांका में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। विभाग ने दोनों मामलों को गंभीर मानते हुए अलग-अलग विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की है।


खास बात यह है कि दोनों इंजीनियरों के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी भी मुख्य जांच आयुक्त, बिहार, पटना को सौंपी गई है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि हेथ चन्दन बांध के जीर्णोद्धार कार्य की निविदा प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही। एक तरफ करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला और दूसरी तरफ सरकारी बांध के जीर्णोद्धार की निविदा में कथित गड़बड़ी—लघु जल संसाधन विभाग के इन तीन मामलों ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल विभागीय जांच और निगरानी इकाई की कार्रवाई के बाद आगे की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।