Bihar Airport News: बिहार में एयर कनेक्टिविटी का दायरा तेजी से बढ़ाने की तैयारी चल रही है. सरकार की योजना के तहत आने वाले वर्षों में राज्य के छोटे और मध्यम शहरों को भी हवाई सेवा से जोड़ने पर काम किया जा रहा है. फिलहाल बिहार में पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट से नियमित हवाई सेवा संचालित हो रही है. इसके अलावा कई नए एयरपोर्ट और हवाई सुविधाओं को विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है.


योजना पूरी होने के बाद गोपालगंज, किशनगंज, सहरसा, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर और दूसरे इलाकों के यात्रियों को फ्लाइट पकड़ने के लिए पटना, दरभंगा या बागडोगरा जैसे बड़े एयरपोर्ट तक लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी. सरकार का लक्ष्य 2030 तक बिहार में 13 एयरपोर्ट को सक्रिय करने का है.


पहले चरण में 6 शहरों में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना

केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत पहले चरण में बिहार के बीरपुर, सहरसा, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मधुबनी और मुजफ्फरपुर में हवाई सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है. इसके लिए बिहार सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच जून 2025 में समझौता हुआ था.


बीरपुर एयरपोर्ट का होगा विस्तार

सुपौल जिले के बीरपुर एयरपोर्ट को बड़े विमानों के संचालन के लिए विकसित किया जा रहा है. इसके लिए 88.83 एकड़ अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. एयरपोर्ट पर रनवे का विस्तार, विमानों के आने-जाने से जुड़ी सुविधाएं और पार्किंग क्षेत्र समेत जरूरी हवाई ढांचे को विकसित किया जाएगा.


एयरपोर्ट के विकास पर करीब 64.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. नेपाल सीमा से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के कारण बीरपुर एयरपोर्ट को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वर्तमान में करीब 1200 मीटर लंबे रनवे को बढ़ाकर लगभग 3 किलोमीटर करने की योजना है.


सहरसा से 19 सीटर विमान की शुरुआत की तैयारी

सहरसा एयरपोर्ट को करीब 35.14 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया जा रहा है. यहां नया टर्मिनल भवन तैयार किया जाएगा. एयरपोर्ट के विकसित होने से सहरसा और आसपास के करीब 20 लाख लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा मिलने की उम्मीद है.


यहां छोटे विमानों का संचालन किया जाएगा. योजना के तहत 15 से 19 सीटों वाले विमानों की सेवा शुरू करने की तैयारी है. डोर्नियर, बीचक्राफ्ट और सेना के विमानों के संचालन के लिए भी एयरपोर्ट को विकसित किया जा रहा है.


मुंगेर के साफियाबाद में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तैयारी

मुंगेर के साफियाबाद के पास ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है. इसके लिए 1720.11 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रस्तावित है. मुआवजे के लिए सरकार ने 773.46 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है.


साफियाबाद में मौजूदा रनवे करीब 758 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा है. इसे बढ़ाकर कम से कम 1200 मीटर लंबा और 70 मीटर चौड़ा करने की योजना है. शुरुआती चरण में यहां 19 सीटर विमान की सेवा शुरू करने की तैयारी है. एयरपोर्ट पर रात में भी विमानों की लैंडिंग की सुविधा विकसित की जाएगी.


वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नेपाल सीमा से लगे वाल्मीकिनगर में करीब 38.64 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट विकसित किया जा रहा है. वाल्मीकिनगर में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व होने के कारण यहां पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं.


एयरपोर्ट शुरू होने के बाद बेतिया, मोतिहारी और नेपाल सीमा से सटे उत्तर बिहार के लोगों को हवाई यात्रा में सुविधा मिलेगी. फिलहाल इस क्षेत्र के यात्रियों को फ्लाइट के लिए दरभंगा या पटना जाना पड़ता है. यहां छोटे विमानों के संचालन की योजना है.


मधुबनी में हेलीपोर्ट बनाने की तैयारी

मधुबनी में एयरपोर्ट की जगह हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. मधुबनी से दरभंगा एयरपोर्ट की दूरी करीब 30 से 40 किलोमीटर है. सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ हवाई सुविधा विकसित होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.


मुजफ्फरपुर के पताही से 19 सीटर विमान उड़ेंगे

मुजफ्फरपुर के पताही एयरपोर्ट को भी विकसित किया जा रहा है. पहले चरण में करीब 23.47 करोड़ रुपये की लागत से टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं.


पताही एयरपोर्ट करीब 101 एकड़ में फैला है और इसके रनवे की लंबाई लगभग 1050 मीटर है. यहां 19 सीटर विमानों के संचालन की योजना है. रनवे विस्तार को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के बाद फिलहाल इस योजना पर रोक लगी हुई है.


दूसरे चरण में गोपालगंज, किशनगंज और सोनपुर पर फोकस

पहले चरण के बाद गोपालगंज, किशनगंज और सोनपुर में एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है. इन परियोजनाओं से बिहार के कई ऐसे इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है, जहां अभी यात्रियों को दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है.


गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट का होगा विकास

गोपालगंज के हथुआ प्रखंड में स्थित सबेया एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना है. इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल ब्रिटिश शासन के दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध के समय किया गया था.


आजादी के बाद रक्षा मंत्रालय ने एयरपोर्ट को अपने अधीन ले लिया था. अब इसे छोटे विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए विकसित करने की योजना है. एयरपोर्ट शुरू होने से गोपालगंज और आसपास के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होगी.


किशनगंज में लंबा रनवे, रणनीतिक महत्व भी अहम

किशनगंज के खगड़ा स्थित एयरपोर्ट को भी विकसित किया जा रहा है. इसके लिए रनवे विस्तार और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है.


किशनगंज एयरपोर्ट चीन सीमा से करीब 175 किलोमीटर दूर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक स्थित है. मौजूदा करीब 900 मीटर लंबे रनवे को बढ़ाकर लगभग 2500 मीटर करने का प्रस्ताव है. इससे बड़े विमानों के साथ सैन्य विमानों के संचालन की क्षमता भी विकसित हो सकेगी.


सोनपुर में बनेगा बड़ा एयरपोर्ट

पटना से करीब 25 किलोमीटर दूर सारण जिले के सोनपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है. प्रस्तावित एयरपोर्ट करीब 4228 एकड़ में फैला होगा.


यहां दो रनवे बनाने की योजना है. प्रस्तावित रनवे की लंबाई करीब 4.2 किलोमीटर होगी. बड़े यात्री विमानों के संचालन को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट का विकास किया जाएगा.


बिहार के मौजूदा एयरपोर्ट पर कितने यात्री कर रहे सफर?

बिहार में फिलहाल पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट से हवाई सेवाएं संचालित हो रही हैं. राज्य के इन एयरपोर्ट पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है.


पटना एयरपोर्ट से 43.86 लाख यात्रियों ने किया सफर

वित्त वर्ष 2025-26 में पटना एयरपोर्ट से करीब 43.86 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया. यानी औसतन हर दिन करीब 12 हजार यात्री यहां से यात्रा करते हैं.


बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए पटना के बिहटा में भी एयरपोर्ट विकसित किया जा रहा है. यहां भारतीय वायुसेना का एयरबेस मौजूद है और आने वाले समय में नागरिक विमानों के संचालन की योजना है.


गया एयरपोर्ट से 3.20 लाख यात्रियों की आवाजाही

गया एयरपोर्ट बिहार का एकमात्र इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. बोधगया आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए यह प्रमुख हवाई केंद्र है.


पिछले साल गया एयरपोर्ट से कुल 3,20,295 यात्रियों ने हवाई सफर किया. इनमें करीब 2,15,506 घरेलू और 1,04,789 अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल थे.


दरभंगा एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में 57 फीसदी बढ़ोतरी

दरभंगा एयरपोर्ट से नवंबर 2020 में विमान सेवा शुरू हुई थी. इसके बाद से यहां यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है.


वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक करीब 7.11 लाख यात्रियों ने दरभंगा एयरपोर्ट से सफर किया. पिछले वित्तीय वर्ष में यह संख्या करीब 4.52 लाख थी. इस तरह यात्रियों की संख्या में करीब 57 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.


यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दरभंगा एयरपोर्ट पर नया सिविल एन्क्लेव और बड़ा टर्मिनल बनाया जा रहा है. करीब 643 करोड़ रुपये की लागत से 62,800 वर्ग मीटर में नया टर्मिनल तैयार किया जा रहा है. इसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 30 लाख होगी. टर्मिनल में 40 चेक-इन काउंटर और 5 एयरोब्रिज समेत कई आधुनिक सुविधाएं होंगी.


पूर्णिया एयरपोर्ट से बढ़ी हवाई यात्रा की मांग

सीमांचल में पूर्णिया एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ान शुरू होने के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी आई है. सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक करीब 2.90 लाख से अधिक यात्रियों ने पूर्णिया एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया है.


यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहां नया टर्मिनल बनाने की योजना है. करीब 20,250 वर्ग मीटर में बनने वाले इस टर्मिनल के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है. निर्माण कार्य 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.


नए टर्मिनल में करीब 515 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी. इसके अलावा 5 से 7 पार्किंग स्टैंड तैयार किए जाने की योजना है.


बिहार में नए एयरपोर्ट और मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार से पटना और दरभंगा जैसे प्रमुख एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम होने की उम्मीद है. छोटे शहरों में हवाई सेवा शुरू होने से लोगों को अपने नजदीकी शहर से ही दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और दूसरे बड़े शहरों के लिए उड़ान की सुविधा मिल सकेगी. इससे पर्यटन, कारोबार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.