पटना: बिहार में हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ लेने वाले लोगों के लिए अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या आने वाले दिनों में मुफ्त बिजली की सुविधा खत्म होने वाली है? क्या सरकार अब हर परिवार को मिलने वाली 125 यूनिट मुफ्त बिजली में बदलाव करने की तैयारी कर रही है? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की हालिया अपील के बाद इन सवालों की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल सरकार ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को बंद करने का कोई ऐलान नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने सिर्फ आर्थिक रूप से सक्षम और आयकरदाता परिवारों से स्वेच्छा से इस सब्सिडी का लाभ छोड़ने की अपील की है।
पटना में रविवार को आयोजित दो दिवसीय ‘पाटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद-2.0’ में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिजली सब्सिडी को लेकर सरकार की सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम हैं और जिन्हें मुफ्त बिजली की सुविधा की जरूरत नहीं है, वे स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ दें। मुख्यमंत्री ने इसे बिहार के विकास में सक्षम नागरिकों की भागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि सब्सिडी छोड़ने से बचने वाली राशि को विकास और नव-निर्माण के काम में लगाया जा सकेगा।
यही बयान अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या सरकार आने वाले समय में मुफ्त बिजली का दायरा सीमित करने की तैयारी कर रही है? क्या पहले संपन्न लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील होगी और बाद में योजना के नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा? फिलहाल इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। सरकार की मौजूदा स्थिति यही है कि 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ अमीर और गरीब सभी परिवारों को मिल रहा है।
दरअसल, इस योजना पर सरकार का खर्च काफी बड़ा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक एक परिवार पर सालाना करीब 8 से 10 हजार रुपये तक बिजली सब्सिडी का खर्च आ रहा है। पूरे बिहार में सिर्फ बिजली सब्सिडी के मद में सरकार हर साल करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ा सवाल सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव का भी है।
अगर आर्थिक रूप से सक्षम परिवार स्वेच्छा से मुफ्त बिजली छोड़ते हैं, तो सरकार के मुताबिक इस मद में होने वाला खर्च कम हो सकता है। इसके बाद बचने वाली राशि को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दूसरे विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की अपील का मूल आधार भी यही है कि जिसे सब्सिडी की जरूरत नहीं है, वह अपनी सुविधा छोड़कर उस पैसे को राज्य के विकास में लगाने का रास्ता खोले।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ संपन्न लोगों के सब्सिडी छोड़ने से सरकार का बिजली पर होने वाला 23 हजार करोड़ रुपये का खर्च काफी कम हो जाएगा? और अगर बड़ी संख्या में सक्षम परिवार इस सुविधा को छोड़ते हैं, तो क्या भविष्य में सरकार 125 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना को लेकर कोई नया नियम बनाएगी? इन सवालों पर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बिजली सब्सिडी के साथ-साथ सरकार की दूसरी बड़ी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। इस योजना पर सरकार सालाना करीब 18 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में लगातार निवेश किया जा रहा है।
तकनीक आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के 534 प्रखंडों में स्थापित 700 मॉडल स्कूलों के करीब 3.5 लाख विद्यार्थियों के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार देर रात एक बजे भी पढ़ाई से जुड़ी समस्या होने पर छात्र को महज एक मिनट में शिक्षक से जोड़कर उसकी शंका दूर की जा सकती है।
वहीं बिहार में खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 20 नए खेल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अगले वर्ष 31 मार्च तक राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में ‘जीविका-सुधा बिक्री केंद्र’ स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 3,200 ‘सुधा सखी’ तैयार करने की योजना है।
इन तमाम योजनाओं के बीच मुफ्त बिजली को लेकर मुख्यमंत्री की अपील को सरकार के बड़े वित्तीय फैसलों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। बिजली और शिक्षा जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार सालाना 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार सब्सिडी को लेकर क्या रणनीति अपनाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
फिलहाल इतना साफ है कि बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली बंद करने का कोई फैसला घोषित नहीं हुआ है। लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की संपन्न और आयकरदाता परिवारों से सब्सिडी छोड़ने की अपील ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार भविष्य में मुफ्त बिजली योजना के नियमों में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगी? आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस पर कोई नया फैसला या घोषणा होती है तो तस्वीर और साफ हो सकती है।