DARBHANGA:भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद डीएसपी राजेश शर्मा को बिहार पुलिस की मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो इकाई में डीएसपी बनाये जाने पर मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने नाराजगी जताई। जिस विभाग में राजेश शर्मा को भेजा गया, उस विभाग के मंत्री मदन सहनी ने कहा कि भोजपुर में हुई भरत तिवारी एनकाउंटर की घटना पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। मामले की जांच के लिए आयोग का भी गठन किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।


मंत्री ने कहा कि जब किसी अधिकारी पर इतना गंभीर आरोप हो और मामले की जांच चल रही हो, तब ऐसे अधिकारी को किसी विभाग में पोस्टिंग नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तबादला करना सरकार का विशेषाधिकार है, इसलिए वह इस पर अधिक टिप्पणी नहीं कर सकते। मंत्री के इस बयान के बाद डीएसपी के तबादले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।


गौरतलब है कि बीते 01 जुलाई को बिहार सरकार ने पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 12 आईपीएस और 53 डीएसपी अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया था। इस लिस्ट में भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा को भी नई पोस्टिंग दी गई। राजेश कुमार शर्मा को बिहार पुलिस की मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो इकाई में डीएसपी बनाया गया।


बता दें कि सप्ताहभर पहले उन्हें भोजपुर के जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच किया गया था। उनके खिलाफ शाहपुर थाना में हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। नामजद केस दर्ज होने के बाद एसडीपीओ राजेश शर्मा पर सरकार ने ऐक्शन लेते हुए लाइन हाजिर कर दिया था। उनको बिहार पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया था। वही जगदीशपुर का नया एसडीपीओ पंकज कुमार मिश्रा को बना दिया गया। लेकिन अब राजेश कुमार शर्मा को पोस्टिंग दे दी गयी। राजेश कुमार शर्मा को बिहार पुलिस की मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो इकाई में डीएसपी बनाया गया। 


क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का है। 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। परिजनों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि भरत तिवारी ने अपना हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद एसटीएफ और स्थानीय पुलिस टीम ने उसे नजदीक से गोली मार दी थी। भरत तिवारी के सरेंडर करने तक का वीडियो लाइव सभी ने देखा। सोशल मीडिया पर यह वीडियो खूब वायरल हुआ। घटना के बाद मामला लगातार सुर्खियों में रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर पर पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे। इस मामले ने राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दिया।


हत्या का केस दर्ज, थानेदार भी निलंबित

विवाद बढ़ने के बाद भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को निलंबित कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, थानेदार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद राजेश कुमार शर्मा को फील्ड पोस्टिंग से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। हालांकि, अब महज एक सप्ताह के भीतर ही उन्हें पटना स्थित मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में नई तैनाती दे दी गई है।


अब नई पोस्टिंग पर उठ रहे सवाल

हत्या के मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद आरोपी अधिकारी को नई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस विभाग का कहना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है। फिलहाल पूरे मामले की कानूनी जांच जारी है।