Bharat Tiwari Encounter : भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच में अब एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है। मामले की जांच कर रहे न्यायिक जांच आयोग ने दो अहम प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को तलब किया है। सोमवार को मंटू चौधरी और सत्यनारायण चौधरी आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराएंगे। जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इन दोनों गवाहों की गवाही मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर नई रोशनी डाल सकती है।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले भरत तिवारी के माता-पिता न्यायिक जांच आयोग के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं। उन्होंने अपने बेटे के कथित एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की थी। साथ ही उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी मांग दोहराई थी। अब आयोग प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे दोनों गवाहों के बयान दर्ज कर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगा।
मंटू चौधरी और सत्यनारायण चौधरी का दावा है कि 17 जून की सुबह वे जवइनिया पुनर्वास टाउनशिप के समीप मौजूद थे। उनके अनुसार, कथित एनकाउंटर से कुछ समय पहले पुलिस टीम ने उन्हें घटनास्थल से जबरन हटा दिया था। उनका कहना है कि यदि उन्हें वहां से नहीं हटाया जाता तो वे पूरी घटना के प्रत्यक्षदर्शी होते। इसी दावे के आधार पर आयोग ने उनके बयान को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें गवाह के रूप में पेश होने के लिए समन जारी किया है।
सूत्रों के मुताबिक, न्यायिक जांच आयोग यह जानने का प्रयास करेगा कि घटना से पहले वहां की परिस्थितियां क्या थीं, पुलिस की गतिविधियां कैसी थीं और किन परिस्थितियों में स्थानीय लोगों को घटनास्थल से हटाया गया। यदि गवाहों के बयान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों से मेल खाते हैं, तो इससे जांच को नई दिशा मिल सकती है।
माना जा रहा है कि आयोग गवाहों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछ सकता है। इनमें घटना से पहले की स्थिति, पुलिस की मौजूदगी, स्थानीय लोगों की गतिविधियां, कथित एनकाउंटर के दौरान की परिस्थितियां और पुलिस द्वारा उन्हें हटाए जाने की वजह जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं। इन सवालों के जवाब जांच के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
इस पूरे मामले पर लंबे समय से लोगों की नजर बनी हुई है। भरत तिवारी के परिजनों का लगातार आरोप रहा है कि एनकाउंटर वास्तविक नहीं था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, आयोग सभी पक्षों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि किसी भी न्यायिक जांच में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष केवल गवाहों के बयानों के आधार पर नहीं बल्कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य गवाहियों के समग्र मूल्यांकन के बाद ही निकाला जाता है।
अब सोमवार को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि मंटू चौधरी और सत्यनारायण चौधरी के बयान मामले के घटनाक्रम को बेहतर तरीके से समझने में आयोग की मदद करेंगे। हालांकि, यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि न्यायिक जांच अभी जारी है और आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं मानी जा सकती। आयोग सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही अपनी रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंपेगा।