Bihar News : राजधानी पटना स्थित बेउर केंद्रीय कारा में नियमों की अनदेखी और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जेल परिसर में निलंबित अधिकारियों के अनधिकृत प्रवेश और कथित तौर पर गोपनीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोपों ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में बेउर जेल के उपाधीक्षक सुधीर शर्मा को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया है। यदि जांच में उनकी भूमिका या लापरवाही साबित होती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ निलंबन भी किया जा सकता है।
इसी मामले में जेल प्रशासन ने चार कक्षपालों संजीव कुमार गुप्ता, धीरज कुमार, उमेश कुमार और अजय जॉन मरांडी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने निलंबित अधिकारियों को बिना किसी जांच-पड़ताल और अनुमति के जेल परिसर में प्रवेश करने दिया तथा इस पूरी घटना में उनकी मिलीभगत भी सामने आई है।
कैसे सामने आया मामला?
जानकारी के अनुसार हाल ही में कुछ निलंबित जेल अधिकारियों के लगातार बेउर जेल आने-जाने की सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि संबंधित अधिकारी कई दिनों तक बिना किसी रोक-टोक के जेल परिसर में प्रवेश करते रहे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न कार्यालयों में रखी गोपनीय फाइलों और दस्तावेजों तक पहुंच बनाई। मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने इसकी गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
उपाधीक्षक से मांगा गया जवाब
जेल प्रशासन ने उपाधीक्षक सुधीर शर्मा को जारी शोकॉज नोटिस में पूछा है कि जब निलंबित अधिकारी लगातार जेल परिसर में प्रवेश कर रहे थे और कथित रूप से महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे, तब उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? यदि जानकारी थी तो इसकी सूचना समय रहते विभाग को क्यों नहीं दी गई? प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी घटना बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी या गंभीर लापरवाही के संभव नहीं हो सकती। इसलिए उनसे पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
गोपनीय फाइलें खंगालने और साक्ष्य मिटाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि पांच निलंबित अधिकारियों ने लगातार तीन-चार दिनों तक बेउर जेल में प्रवेश किया। इन अधिकारियों में तत्कालीन उपाधीक्षक अजय कुमार, सहायक अधीक्षक अभिषेक कुमार, मनीष कुमार ठाकुर, शालिनी कुमारी और कुंदन कुमार शामिल बताए जा रहे हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने जेल के कार्यालयों में रखी गोपनीय फाइलों को खंगाला, कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को फाड़ दिया और जांच से जुड़े संभावित साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपराधिक अपराध की श्रेणी में भी माना जाएगा।
पहले ही दर्ज हो चुका है केस
इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए बेउर जेल प्रशासन ने 28 जुलाई को पांचों निलंबित अधिकारियों के खिलाफ बेउर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब पुलिस इस मामले की विधिवत जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक बेउर थाना पुलिस जल्द ही सभी आरोपित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाएगी। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई और इस पूरे घटनाक्रम में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
अन्य जेल अधीक्षकों को भी शोकॉज
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने केवल बेउर जेल तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। शिवहर, सुपौल और कटिहार जेल के अधीक्षकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दरअसल, जिन पांच अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनकी तैनाती इन जेलों में की गई थी। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि निलंबन के बाद उनकी गतिविधियों की निगरानी क्यों नहीं की गई और वे बेउर जेल तक कैसे पहुंचते रहे। फिलहाल पूरे मामले की विभागीय और पुलिस स्तर पर जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर और भी कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।