Bihar Land News :  बिहार सरकार ने बेतिया राज की ऐतिहासिक संपत्तियों को राज्य में निहित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छह जिलों में स्थित बेतिया राज की 7,272.16 एकड़ से अधिक भूमि के संबंध में अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में, पारदर्शी तरीके से और निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई बेतिया राज की संपत्तियों को राज्य में निहित करने संबंधी अधिनियम, 2024 और नियमावली, 2026 के तहत की जा रही है। अधिसूचना जारी होने के बाद अब संबंधित भूमि को बिहार सरकार में निहित करने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

छह जिलों की भूमि को लेकर जारी हुई अधिसूचना

विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में गोपालगंज, सारण, सिवान, पटना, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जिलों में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। इनमें सबसे अधिक भूमि पूर्वी चंपारण जिले में स्थित है।

जिलावार आंकड़ों के अनुसार—

इन सभी जिलों की कुल भूमि 7,272.16 एकड़ है, जिसे राज्य में निहित करने की प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने के साथ ही औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।


अधिसूचना में दर्ज हैं सभी जरूरी विवरण

राजस्व विभाग के अनुसार जारी अधिसूचनाओं में प्रत्येक भूमि का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। इसमें संबंधित अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा संख्या और रकबा का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। विभाग का कहना है कि इस तरह का विस्तृत रिकॉर्ड प्रकाशित करने का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और तथ्यपरक बनाना है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।


ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर सरकार का जोर

सचिव जय सिंह ने कहा कि बेतिया राज की संपत्तियां केवल भूमि नहीं हैं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की धरोहर भी हैं। राज्य सरकार इन परिसंपत्तियों के व्यवस्थित अभिलेखीकरण, संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।


उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों को राज्य के अधिकार में लाने के बाद उनका उपयोग राज्यहित और जनहित से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा। साथ ही इनके रिकॉर्ड को भी सुव्यवस्थित किया जाएगा ताकि भविष्य में इन परिसंपत्तियों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

विकास योजनाओं में हो सकेगा उपयोग

विभाग का मानना है कि राज्य में निहित होने के बाद इन जमीनों का उपयोग विभिन्न विकास योजनाओं, सार्वजनिक परियोजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इससे सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने में भी सुविधा होगी और परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।

सचिव ने इसे राज्य की परिसंपत्तियों के प्रभावी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ऐतिहासिक संपत्तियों का संरक्षण भी हो और उनका उपयोग आम जनता के हित में भी किया जा सके।

राजपत्र प्रकाशन के साथ प्रभावी होगी कार्रवाई

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि जारी की गई सभी अधिसूचनाएं राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी मानी जाएंगी। इसके बाद संबंधित जिलों में नियमावली के अनुरूप आगे की सभी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


विभाग ने कहा कि अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद संबंधित जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बेतिया राज की संपत्तियों को विधिसम्मत तरीके से बिहार राज्य में निहित किया जा सके।