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27-Dec-2025 12:03 PM
By First Bihar
railway safety : बेतिया जिले के गौनाहा रेलवे ढाला फाटक पर आज एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। खुला फाटक पार कर रहे एक ट्रक और एंबुलेंस रेलवे ट्रैक पर फंस गए, तभी सामने से तेज रफ्तार ट्रेन आ रही थी। लोको पायलट ने समय रहते इमरजेंसी ब्रेक लगाया, जिससे किसी तरह बड़ा हादसा टल गया और कई लोगों की जान बच गई। अगर कुछ सेकंड की देरी होती, तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गौनाहा ढाला फाटक पर कोई गेटमैन तैनात नहीं था। फाटक खुला होने के कारण वाहन चालक बेखौफ होकर ट्रैक पार कर रहे थे। इसी लापरवाही के कारण ट्रक और एंबुलेंस फंस गए। घटना के समय आसपास मौजूद राहगीरों की भी जान खतरे में पड़ गई। यह रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक को उजागर करती है।
घटना के बाद ट्रैक खाली करने में कई घंटे लगे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों की मदद से फंसे वाहन सुरक्षित बाहर निकाले गए। इसके बाद ही ट्रेन परिचालन सामान्य हो सका। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि फाटक पर स्थायी गेटमैन की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए। चेतावनी सिग्नल और बैरियर सिस्टम को भी मजबूत किया जाए। लापरवाही के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
यह घटना साबित करती है कि लोको पायलट की सूझबूझ ने बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन भविष्य में ऐसी चूक दोहराई गई तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं। विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि रेलवे फाटक पर सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा और निगरानी आवश्यक है।
स्थानीय लोग भी अब सतर्क हो गए हैं और उन्होंने कहा कि यदि रेलवे प्रशासन जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाता, तो फिर किसी बड़े हादसे की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल लोको पायलट की तत्परता से टला है, लेकिन हर बार इतनी भाग्यशाली घटना नहीं होगी।
रेलवे विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि भविष्य में फाटक पर गेटमैन तैनात करने के साथ ही सुरक्षा उपकरणों को और प्रभावी बनाया जाएगा। वहीं, घटना से यह स्पष्ट हो गया कि खुले फाटक और सुरक्षा उपायों की कमी यात्रियों और राहगीरों के लिए गंभीर खतरे की स्थिति पैदा कर सकती है।
बेतिया जिले के इस रेलवे ढाला फाटक पर अब निगरानी बढ़ाई जाने की बात कही जा रही है। स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों के बीच सुरक्षा उपायों को लेकर बैठक की तैयारी भी शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यह केवल रेल सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम जनता की जान की रक्षा का मामला है।
अंततः यह घटना लोको पायलट की सतर्कता और तत्परता के कारण किसी बड़ी त्रासदी में नहीं बदल पाई, लेकिन यह गंभीर चेतावनी भी है कि यदि सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया गया तो भविष्य में परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। रेलवे प्रशासन से तुरंत ठोस कदम उठाने और फाटक पर स्थायी गेटमैन तैनात करने की मांग जोर पकड़ रही है।
संतोष कुमार की रिपोर्ट