पटना: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। चार राउंड की गिनती पूरी होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। RJD उम्मीदवार रेखा कुमारी को अब तक महज 884 वोट मिले हैं, जबकि जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर (PK) 6269 वोट हासिल कर मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 5124 मत प्राप्त हुए हैं।

बांकीपुर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था, लेकिन शुरुआती मतगणना में सबसे ज्यादा चर्चा RJD उम्मीदवार के कमजोर प्रदर्शन की हो रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तेजस्वी यादव ने जिस MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के भरोसे चुनावी रणनीति बनाई थी, शुरुआती रुझानों में उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है।

रोड शो और प्रचार का असर नहीं दिखा?

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में RJD ने पूरी ताकत झोंक दी थी। तेजस्वी यादव ने बांकीपुर क्षेत्र में रोड शो कर मतदाताओं से समर्थन मांगा था। पार्टी नेताओं को उम्मीद थी कि तेजस्वी की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं में उत्साह आएगा और परंपरागत वोट बैंक RJD के पक्ष में लामबंद होगा।

हालांकि चार राउंड की मतगणना के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने RJD खेमे की चिंता बढ़ा दी है। रेखा कुमारी अभी तक हजार वोट का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई हैं। दूसरी तरफ प्रशांत किशोर और नीरज कुमार सिन्हा लगातार हजारों वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं।

PK की रणनीति ने बदला समीकरण

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की एंट्री ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया था। जन सुराज के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे PK ने लगातार स्थानीय मुद्दों, बदलाव और नई राजनीति को लेकर अभियान चलाया था। शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर को मिले 6269 वोट यह संकेत दे रहे हैं कि उन्हें शहरी मतदाताओं और युवा वर्ग का समर्थन मिल रहा है। बांकीपुर जैसी हाई प्रोफाइल सीट पर PK का प्रदर्शन राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

BJP उम्मीदवार नीरज सिन्हा भी मजबूत

बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा भी शुरुआती चरण में मजबूत मुकाबला देते नजर आ रहे हैं। चार राउंड के बाद उन्हें 5124 वोट मिले हैं। बीजेपी ने इस सीट पर संगठन और स्थानीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति तैयार की थी। नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में पार्टी के बड़े नेताओं ने लगातार प्रचार किया था। बीजेपी का दावा था कि बांकीपुर की जनता एक बार फिर पार्टी पर भरोसा जताएगी।

RJD के लिए बढ़ी चुनौती

बांकीपुर सीट पहले से ही बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। ऐसे में RJD के लिए यहां चुनौती पहले से कठिन थी। पार्टी ने तेजस्वी यादव के चेहरे और सामाजिक समीकरणों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती रुझान उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रहे हैं।

हालांकि अभी मतगणना के कई राउंड बाकी हैं और अंतिम नतीजा आने तक तस्वीर बदल सकती है। लेकिन चार राउंड के बाद जिस तरह से RJD उम्मीदवार पीछे चल रही हैं, उससे पार्टी के अंदर मंथन शुरू होना तय माना जा रहा है।बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते सामाजिक समीकरण और नए राजनीतिक विकल्पों की ताकत का भी संकेत देंगे। फिलहाल सभी की नजरें आगे के राउंड की गिनती पर टिकी हुई हैं।