पटना : शारदीय नवरात्र की शुरुआत होते ही राजधानी पटना में भक्ति और आस्था का माहौल गहरा गया है। कलश स्थापना के साथ ही देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। पटना सिटी स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर में नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली। हाथों में पूजा की थाली, माथे पर आस्था और मां के जयकारों के बीच श्रद्धालु बारी-बारी से माता के दर्शन करते नजर आए।

बड़ी पटन देवी मंदिर सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। नवरात्र के दौरान यहां पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है और पूरे दस दिनों तक मंदिर में अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान और भोग की परंपरा निभाई जाती है।

गर्भगृह में विराजमान हैं मां के तीन स्वरूप

मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से बनी मां के तीन स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती एक साथ विराजमान हैं। इनके अलावा मंदिर परिसर में भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है। नवरात्र के दिनों में इन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। माता के जयकारों और घंटियों की आवाज से पूरा इलाका भक्तिमय हो जाता है।

आधी रात सुनाई देती है पायल की आवाज, नगर रक्षिका हैं मां

बड़ी पटन देवी मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं ऐसी हैं, जो इसे दूसरे देवी मंदिरों से अलग बनाती हैं। मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के मुताबिक, मां पटन देवी को ‘नगर रक्षिका’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां रात के समय नगर का भ्रमण करती हैं।महंत के अनुसार, नवरात्र के दौरान आधी रात के समय मंदिर परिसर में कई बार पायल की आवाज सुनाई देने की मान्यता है। इसे मां के नगर भ्रमण से जोड़कर देखा जाता है। महा अष्टमी के दिन मंदिर में वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से पूजा होती है। तांत्रिक पूजा आधी रात के समय गुप्त रूप से की जाती है। इस पूजा को देखने की अनुमति किसी को नहीं होती।

प्रतिपदा से दशमी तक बदलता है मां का भोग

नवरात्र के दौरान बड़ी पटन देवी मंदिर में मां को अलग-अलग दिनों में अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। मंदिर के महंत के अनुसार, प्रतिपदा से लेकर विसर्जन के दसवें दिन तक भोग की यह परंपरा जारी रहती है। मां को खीर, हलवा और पुआ जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। वहीं शनिवार के दिन खिचड़ी का भोग लगाने की भी परंपरा है। श्रद्धालुओं के लिए यह भोग और पूजा परंपरा मंदिर की धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रहस्यमयी माना जाता है मंदिर का हवन कुंड

बड़ी पटन देवी मंदिर का हवन कुंड भी अपने आप में विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिर के पुजारी कृष्णागिरी के मुताबिक, इस हवन कुंड को लेकर मान्यता है कि इसका संबंध पाताल लोक से है। मान्यता के अनुसार, महानवमी के दिन पूर्णाहुति के दौरान हवन कुंड में डाली गई हुमाद और नारियल समेत पूजा सामग्री कई फीट ऊपर तक उठती है और फिर अपने आप कुंड के भीतर चली जाती है। मंदिर से जुड़ी मान्यता यह भी है कि हवन कुंड की सामग्री को कभी बाहर नहीं निकाला जाता।

51 शक्तिपीठों में शामिल होने की मान्यता

मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के मुताबिक, बड़ी पटन देवी को विश्व के 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के दौरान माता सती के शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे थे और उन स्थानों पर शक्तिपीठ स्थापित हुए। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यहां स्थापित महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाओं को सतयुग से जुड़ा हुआ माना जाता है। मंदिर में बलि की परंपरा भी आज तक चली आ रही है।इतिहास की बात करें तो मान्यता है कि सम्राट अशोक के शासनकाल में मंदिर का स्वरूप आज की तुलना में काफी छोटा था। समय के साथ मंदिर का विस्तार होता गया और आज यह पटना के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।

नवरात्र में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़

शारदीय नवरात्र के दौरान बड़ी पटन देवी मंदिर में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। सुबह से ही दर्शन के लिए कतार लगने लगती है। श्रद्धालु मां के तीनों स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार का भी नए सिरे से पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में और सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पटना जंक्शन और पटना साहिब से ऐसे पहुंचें

बड़ी पटन देवी मंदिर पहुंचने के लिए पटना जंक्शन से ऑटो या बस के जरिए गांधी मैदान और अशोक राजपथ होते हुए पटना सिटी पहुंचा जा सकता है। पटना साहिब स्टेशन से भी ऑटो के माध्यम से मंदिर पहुंचा जा सकता है।गांधी मैदान से अशोक राजपथ होते हुए पटना सिटी पुलिस अनुमंडल कार्यालय की ओर जाने पर दाहिनी तरफ बड़ी पटन देवी मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार दिखाई देता है। इस द्वार से दक्षिण दिशा में आगे बढ़ने पर माता का मंदिर स्थित है। वहीं गायघाट से भी मंदिर करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर है, जहां पैदल या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। नवरात्र के पहले दिन उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया है कि आस्था के इस दरबार में अगले नौ दिनों तक भक्तों का सैलाब यूं ही बना रहने वाला है। मां के जयकारों से पटना सिटी का पूरा इलाका भक्तिमय नजर आ रहा है।