Bihar News: बिहार के रास्ते भारत और नेपाल के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुरधाम अब सीधी ट्रेन सेवा से जुड़ने वाली हैं। इस महत्वाकांक्षी रेल सेवा को नवंबर महीने में ही शुरू करने की तैयारी है। खास बात यह है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह संयुक्त रूप से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। इसके लिए 22 या 23 नवंबर की संभावित तारीख सामने आई है। हालांकि, उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक अंतिम घोषणा का इंतजार है।


इस ट्रेन के शुरू होने से अयोध्या से जनकपुर जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अभी दोनों धार्मिक नगरियों के बीच यात्रा करने के लिए यात्रियों को अलग-अलग साधनों का सहारा लेना पड़ता है। सीधी रेल सेवा शुरू होने के बाद राम की नगरी से सीता की नगरी तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। इस रेल मार्ग की सबसे खास बात यह है कि ट्रेन बिहार के मधुबनी जिले में स्थित जयनगर से होकर नेपाल में प्रवेश करेगी और जनकपुरधाम तक पहुंचेगी।


रेलवे ने इस रूट पर परिचालन की तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को नेपाल में जयनगर से जनकपुरधाम और कुर्था तक ट्रेन चलाकर ट्रायल किया गया। इस महत्वपूर्ण परीक्षण में भारतीय रेलवे और नेपाल रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के अपर महाप्रबंधक अमरेंद्र कुमार भी निरीक्षण के लिए जयनगर पहुंचे थे। उनके साथ दोनों देशों के रेलवे और प्रशासनिक विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।


ट्रायल के लिए दो इंजन के साथ 17 खाली बोगियों वाली विशेष ट्रेन का इस्तेमाल किया गया। यह ट्रेन सुबह करीब 9:10 बजे जयनगर से रवाना हुई। इसके बाद निर्धारित रेलखंड पर परिचालन की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण किया गया। दोपहर करीब 1:45 बजे ट्रायल पूरा होने के बाद ट्रेन वापस जयनगर लौट आई। इस परीक्षण को नियमित रेल सेवा शुरू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


निरीक्षण के दौरान रेलवे अधिकारियों ने यात्री सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी कमियों को जल्द दूर करने का निर्देश दिया। नेपाल के धनुषा जिले के सीडीओ भूदेव झा, नेपाल रेलवे के जीएम परवेश पराजुली सहित कई अधिकारी इस दौरान मौजूद रहे। भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने भी परिचालन से पहले जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा करने पर जोर दिया। रेलवे की कोशिश है कि उद्घाटन से पहले तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।


इस अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा में यात्रियों के लिए कस्टम जांच की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। चूंकि ट्रेन भारत से नेपाल में प्रवेश करेगी, इसलिए सीमा पार करने वाले यात्रियों और ट्रेनों की जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, जयनगर में कस्टम विभाग की ओर से दोनों तरफ से आने-जाने वाली ट्रेनों की जांच की समुचित व्यवस्था रहेगी। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाया जा रहा है। यात्रियों को सफर के दौरान सीमा संबंधी जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।


टिकट बुकिंग को लेकर भी यात्रियों के लिए अहम जानकारी सामने आई है। इस ट्रेन से यात्रा करने के लिए टिकट की बुकिंग IRCTC के माध्यम से की जा सकेगी। भारत और नेपाल दोनों तरफ के यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट से टिकट बुक कर सकेंगे। हालांकि, अभी ट्रेन का पूरा टाइम टेबल, किराया, कोच की श्रेणी और टिकट बिक्री शुरू होने की तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। इन जानकारियों के लिए रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।


अयोध्या और जनकपुरधाम को जोड़ने वाली यह ट्रेन केवल एक रेल सेवा नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के धार्मिक एवं सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने वाली पहल भी मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है, जबकि जनकपुरधाम माता सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। रामायण में दोनों नगरियों का विशेष महत्व है। जनकपुर में माता सीता और भगवान श्रीराम के विवाह से जुड़े कई धार्मिक स्थल हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


सीधी ट्रेन सेवा शुरू होने से रामायण सर्किट को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की आवाजाही को भी बढ़ावा मिल सकता है। बिहार के जयनगर को इस अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्क का प्रमुख पड़ाव बनने से सीमावर्ती इलाके के लोगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।


अगर 22 या 23 नवंबर को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम संपन्न होता है तो अयोध्या और जनकपुरधाम के बीच सीधी रेल यात्रा का सपना साकार हो जाएगा। राम और सीता की नगरी को जोड़ने वाली यह ट्रेन भारत-नेपाल संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।